
रांची, 26 अक्टूबर 2026।अबूआ न्यूज़ झारखंड
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित धांधली की जांच के दौरान सीआईडी ने कई अहम साक्ष्य मिलने का दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के लैपटॉप बैग से 15 अभ्यर्थियों की एक सूची मिली थी। इसमें अभ्यर्थियों के रोल नंबर, इंटरव्यू की तारीख और डीएसपी व जेएएस जैसे पदों का विवरण हाथ से लिखा हुआ था। अंतिम परिणाम से मिलान करने पर सूची में शामिल 15 में से 10 अभ्यर्थियों के चयन की बात सामने आई है।
सूची में शामिल अभ्यर्थियों के नाम आए सामने
सीआईडी के अनुसार, सूची में कश्मीरा हेम्ब्रम, रवि कुमार, महिमा सिंह, विवेक कुमार, जयदीप चौधरी, जनक राज, शालिनी राठी, सेजल सहरावत, विक्की और सरिता बारला के नाम शामिल हैं। हालांकि, सूची में नाम होने या चयनित होने मात्र से किसी अभ्यर्थी की संलिप्तता साबित नहीं होती।
परीक्षा का काम दिलाने के बदले करोड़ों की डील का आरोप
जांच के मुताबिक, मार्च 2025 में बिचौलियों धर्मेंद्र, अभय तिवारी और रवि मास्टर के माध्यम से तत्कालीन अध्यक्ष के सरकारी आवास पर टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह के साथ बैठक हुई थी। इसके बाद होटल रेडिसन ब्लू में हुई एक अन्य बैठक में परीक्षा का काम देने के बदले दो करोड़ रुपये नकद और कुल बिलिंग पर 10 प्रतिशत कमीशन तय किए जाने का आरोप है। इस बैठक में एल. खियांग्ते, रामबीर, सत्यपाल, धर्मेंद्र और सांत्वना प्रकाश के शामिल होने की बात कही गई है।
जांच में ब्लैकलिस्टेड कंपनी बिंसिस के निदेशक अरुण कुमार के साथ भी कथित तौर पर इसी तरह की डील और एक करोड़ रुपये नकद दिए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा, आइजोल स्थित खियांग्ते के निजी आवास तक ढाई लाख रुपये पहुंचाने से जुड़े वित्तीय लेन-देन और यात्रा के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
कॉल रिकॉर्ड और मूल प्रवेश पत्र भी जांच के दायरे में
सीआईडी के अनुसार, कॉल डिटेल रिकॉर्ड में एल. खियांग्ते और मुख्य बिचौलिये धर्मेंद्र के बीच अलग-अलग अवधियों में 267, 65 और आठ बार बातचीत के रिकॉर्ड मिले। तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से 304 बार, आयोग के कर्मी सोनू कुमार से 139 बार और अभय तिवारी से 12 बार संपर्क दर्ज होने का दावा किया गया है। उमेश कुमार और रामबीर सिंह से संपर्क के तकनीकी साक्ष्य मिलने की बात भी कही गई है।
परीक्षा प्रक्रिया में कई स्तरों पर गड़बड़ी के आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, अध्यक्ष के आवासीय कार्यालय से एफआरओ मुख्य परीक्षा के आठ अभ्यर्थियों के मूल प्रवेश पत्र जब्त किए गए। इसके अलावा, निविदा प्रक्रिया में कथित हेरफेर, फर्जी प्रतिस्पर्धी कंपनियां खड़ी करने, उत्तर पुस्तिकाएं लिखने के वीडियो और प्रश्नपत्र छपाई से लेकर ओएमआर शीट, मूल्यांकन व इंटरव्यू तक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। स्ट्रांग रूम की सुरक्षा कमजोर करने और ओएमआर शीट में बाद में उत्तर भरवाने की कथित साजिश की भी जांच की जा रही है।





