पूर्वी सिंहभूम की लेखिका की ‘मनु एंड मिरुज मेलोडी’ पुस्तक को IBBY-UNESCO के संग्रह में मिली जगह, संताली और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है उपलब्ध

रांची/जमशेदपुर। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम की बेटी बंदना टुडू ने अपनी लेखनी और कला के जरिए राज्य का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उनके द्वारा लिखी और चित्रों से सजायी गयी बाल पुस्तक ‘मनु एंड मिरुज मेलोडी’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। पुस्तक का संताली नाम ‘मिरू आर मिरुवाः लिठूर आडांग’ है। इसे कनाडा के ओटावा में आयोजित यूनेस्को के कार्यक्रम के दौरान IBBY-UNESCO संग्रह में शामिल किया गया है।
स्वदेशी और लुप्तप्राय भाषाओं की पुस्तकों का संग्रह
यह संग्रह स्वदेशी और लुप्तप्राय भाषाओं में प्रकाशित उल्लेखनीय पुस्तकों को पहचान देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। ऐसे में संताली भाषा की इस बाल पुस्तक का संग्रह में शामिल होना झारखंड और संताली साहित्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। 6 से 9 अगस्त तक कनाडा के ओटावा में आयोजित कार्यक्रम में इस उपलब्धि को स्थान मिला।
2024 में प्रकाशित हुई थी पुस्तक
बंदना टुडू की यह पुस्तक वर्ष 2024 में प्रकाशित हुई थी। इसे Amazon KDP के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया गया। पुस्तक को खास तौर पर बच्चों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और यह संताली तथा अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में उपलब्ध है।
पुस्तक की खास बात यह भी है कि इसके लिए बच्चों को आकर्षित करने वाले चित्र बंदना टुडू ने खुद बनाए हैं। यानी कहानी लिखने से लेकर पुस्तक को चित्रों के जरिए जीवंत बनाने तक उन्होंने स्वयं भूमिका निभायी है।
अमेरिका में रह रही हैं बंदना टुडू
पूर्वी सिंहभूम से ताल्लुक रखने वाली बंदना टुडू फिलहाल अमेरिका में रह रही हैं। विदेश में रहते हुए भी उन्होंने संताली भाषा और संस्कृति से जुड़ी रचनात्मक पहल को आगे बढ़ाया है। उनकी पुस्तक को अंतरराष्ट्रीय संग्रह में जगह मिलना संताली भाषा के साहित्य और बच्चों के लिए तैयार की जा रही क्षेत्रीय भाषा की पुस्तकों को वैश्विक मंच मिलने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
संताली भाषा के लिए महत्वपूर्ण पहचान
संताली भाषा भारत की प्रमुख आदिवासी भाषाओं में शामिल है। ऐसे में संताली में लिखी गयी बाल पुस्तक का अंतरराष्ट्रीय स्तर के संग्रह में शामिल होना न सिर्फ लेखिका के लिए, बल्कि झारखंड के साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत के लिए भी गौरव की बात है।
बंदना टुडू की ‘मनु एंड मिरुज मेलोडी’ अब संताली भाषा की उन चुनिंदा पुस्तकों में शामिल हो गयी है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

