देश के परमाणु ऊर्जा लक्ष्य में झारखंड की अहम भूमिका, यूसील बढ़ाएगा यूरेनियम उत्पादन
2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के लिए मौजूदा खदानों के विस्तार और नए यूरेनियम स्रोतों की तलाश पर जोर

जमशेदपुर: वर्ष 2047 तक देश में 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य में झारखंड की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। परमाणु रिएक्टरों के लिए जरूरी यूरेनियम की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी यूसील मौजूदा खदानों के विस्तार के साथ नए स्रोत विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश के चिह्नित यूरेनियम संसाधनों में झारखंड की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत है। जादूगोड़ा से शुरू हुआ यूरेनियम उत्पादन अब देश की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण गतिविधि बन चुका है।
झारखंड में सात खदानों से हो रहा उत्पादन
राज्य में यूसील की सात खदानें संचालित हैं। इसके अलावा जादूगोड़ा और तुरामडीह में यूरेनियम अयस्क के प्रसंस्करण की व्यवस्था है। खदानों से प्राप्त अयस्क को इन संयंत्रों में आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाता है।
यूसील के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. डी. आनंद राव के अनुसार, कंपनी देश में कई दशकों से सुरक्षित तरीके से यूरेनियम खनन कर रही है। उन्होंने झारखंड को देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण बताया।
दूसरे राज्यों में भी तलाशे जा रहे नए स्रोत
यूसील झारखंड की मौजूदा खदानों तक सीमित रहने के बजाय देश के अन्य हिस्सों में भी यूरेनियम संसाधन विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। राजस्थान और आंध्र प्रदेश में नए संसाधनों के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इसके साथ ही एनटीपीसी के कोयला टेलिंग्स से यूरेनियम निकालने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। यह प्रयास तकनीकी और आर्थिक रूप से सफल होने पर यूरेनियम उपलब्धता का एक अतिरिक्त विकल्प बन सकता है। फिलहाल इसे अध्ययन के स्तर पर देखा जा रहा है।
ऊर्जा आपूर्ति और आत्मनिर्भरता से जुड़ा लक्ष्य
परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ने से देश की बढ़ती बिजली मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है। कम कार्बन उत्सर्जन वाले ऊर्जा स्रोत के रूप में इसकी क्षमता बढ़ाने से लंबे समय में कोयले पर निर्भरता घटाने में भी योगदान मिल सकता है।
घरेलू यूरेनियम संसाधनों का विकास परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए ईंधन की उपलब्धता मजबूत करने की दिशा में अहम होगा। इसी जरूरत को देखते हुए यूसील उत्पादन बढ़ाने और नए संसाधनों की पहचान पर जोर दे रहा है।
रेडिएशन से जुड़े सवालों पर तथ्य आधारित जानकारी जरूरी
डॉ. आनंद राव ने रेडिएशन को लेकर लोगों की आशंकाओं के संदर्भ में तथ्य आधारित जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इस विषय पर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना महत्वपूर्ण है।




