
झारखंड की ग्रामीण सड़कों को इस साल भी मरम्मत का इंतजार, PMGSY की जर्जर सड़कों पर अगले साल तक टिकी उम्मीद
केंद्रीय जांच टीम ने सड़कों की खराब हालत पर जताई चिंता, तत्काल मेंटेनेंस के निर्देश; 1600 करोड़ के बजट के बावजूद मरम्मत योजनाओं पर अब तक फैसला नहीं

रांची। झारखंड की ग्रामीण सड़कों की हालत सुधारने के लिए लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी कई सड़कें लंबे समय से खराब हैं, लेकिन वित्तीय वर्ष 2025-26 में मरम्मत की एक भी योजना स्वीकृत नहीं हो सकी थी। अब चालू वित्तीय वर्ष में भी मेंटेनेंस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
ऐसे में जिन सड़कों पर गड्ढे और टूट-फूट बढ़ती जा रही है, उनकी मरम्मत समय पर नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ सकती है। विभागीय स्तर पर यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो कई सड़कों को अगले वित्तीय वर्ष तक इंतजार करना पड़ सकता है।
केंद्रीय टीम ने भी सड़कों की हालत पर जताई चिंता
करीब एक सप्ताह पहले दिल्ली से आई नेशनल क्वालिटी मॉनिटरिंग और जांच टीम ने राज्य में PMGSY की सड़कों का निरीक्षण किया। टीम ने कई सड़कों की स्थिति को खराब पाया और मेंटेनेंस की कमी पर सवाल उठाए।
टीम ने ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों को खराब सड़कों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक मरम्मत कराने का निर्देश दिया है। इसके बाद विभाग ने भी मामले को गंभीरता से लिया है।
1600 करोड़ का बजट, फिर भी मरम्मत पर असमंजस
चालू वित्तीय वर्ष में सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 1600 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। हालांकि, मरम्मत के लिए योजनाएं किस नीति और प्रक्रिया के तहत ली जाएंगी, इस पर अब तक स्पष्ट निर्णय नहीं हो पाया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी मरम्मत योजनाओं से जुड़ी नीति तय नहीं हो पाने के कारण एक भी योजना स्वीकृत नहीं हुई थी। इस वजह से जिन सड़कों की हालत पहले से खराब थी, वे समय के साथ और जर्जर होती चली गईं।
विभागीय इंजीनियरों के अनुसार अभी वित्तीय वर्ष समाप्त होने में करीब छह महीने का समय है। यदि जल्द मरम्मत योजनाओं को मंजूरी मिलती है तो कुछ सड़कों की स्थिति इसी वित्तीय वर्ष में सुधारी जा सकती है। अन्यथा बड़ी संख्या में सड़कों को अगले वित्तीय वर्ष तक इंतजार करना पड़ सकता है।
पांच साल तक ठेकेदार की जिम्मेदारी
PMGSY के तहत बनी सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण के बाद पांच साल तक संबंधित ठेकेदार की होती है। पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद राज्य सरकार को अपने बजट से इन सड़कों की मरम्मत करानी होती है।
बताया गया है कि करीब दो वर्ष पहले राज्य सरकार की ओर से कुछ मरम्मत योजनाओं को मंजूरी दी गई थी, लेकिन उनका क्रियान्वयन नहीं हो सका। इसका असर अब सड़कों की स्थिति पर दिखाई दे रहा है।
10-20 साल पुरानी कई सड़कें बदहाल
राज्य के ग्रामीण इलाकों में PMGSY के तहत बनी कई सड़कें 10 से 20 साल पुरानी हो चुकी हैं। लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण कई जगह सड़कें टूट गई हैं और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
ग्रामीणों के लिए एक गांव से दूसरे गांव तक आने-जाने में परेशानी हो रही है। बरसात के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है, क्योंकि पानी भरने और सड़क टूटने से आवागमन जोखिम भरा हो जाता है।
अब केंद्रीय टीम के निर्देश के बाद विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि खराब सड़कों की मरम्मत के लिए योजना को जल्द मंजूरी देकर काम शुरू कराया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की समस्या को कम किया जा सके।




