नहीं रहीं रूपी सोरेन, सोरेन परिवार ने खोया ममता और संबल का आधार
Jharkhand Mourns Rupi Soren: CM Hemant Soren Loses His Mother, Soren Family Its Pillar of Strength
झारखंड शोक में: नहीं रहीं रूपी सोरेन, सोरेन परिवार ने खोया ममता और संबल का आधार
शिबू सोरेन के संघर्षों की जीवनसंगिनी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां के निधन से परिवार व झामुमो कार्यकर्ताओं में गहरा शोक
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नेताओं में शामिल दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन का निधन हो गया। उन्होंने 7 अक्टूबर को रांची के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से सोरेन परिवार, झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों में गहरा शोक है।

रूपी सोरेन परिवार के लिए ममता, हिम्मत और भरोसे का वह आधार थीं, जिसने कठिन परिस्थितियों में सबको एक सूत्र में बांधे रखा। शिबू सोरेन के लंबे सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष के दौरान उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं और जीवन के उतार-चढ़ाव में उनका साथ निभाया।
झारखंड आंदोलन के कठिन दौर में, जब शिबू सोरेन महाजनी प्रथा और शोषण के खिलाफ संघर्ष में जुटे थे, रूपी सोरेन घर और बच्चों का सहारा बनी रहीं। सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बीच परिवार को संभालने में उनकी भूमिका उस संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा रही, जिसकी चर्चा अक्सर सार्वजनिक मंचों से दूर रह जाती है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मां के निधन पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा—“बाबा के जाने के बाद माँ ही मेरी सबसे बड़ी छाँव थीं।” उनके इन शब्दों में मां से बिछड़ने का दर्द और परिवार के जीवन में उनकी जगह, दोनों झलकते हैं।
रूपी सोरेन को झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच भी बेहद सम्मान और अपनापन मिला। परिवार के साथ उनका जुड़ाव केवल निजी जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं था; संघर्ष और संकट के समय वह अपनों के लिए भावनात्मक संबल बनी रहीं। शिबू सोरेन के निधन के बाद उनका साथ परिवार के लिए और भी महत्वपूर्ण हो गया था।
उनके पुत्र स्वर्गीय दुर्गा सोरेन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन ने झारखंड की राजनीति में अपनी भूमिका निभाई। इस सार्वजनिक जीवन के पीछे रूपी सोरेन का स्नेह, धैर्य और परिवार को जोड़े रखने की शक्ति हमेशा मौजूद रही।
उनके जाने से सोरेन परिवार ने केवल अपनी मां को नहीं खोया है, बल्कि वह सहारा भी खो दिया है, जिसके पास लौटकर हर दुख कुछ हल्का हो जाता था। झारखंड आंदोलन की एक जीवनसंगिनी और परिवार की ममता भरी छांव के रूप में उनकी स्मृतियां अपनों के बीच बनी रहेंगी।





