
झारखंड के चार जिले साइबर अपराध के टॉप-15 में, देवघर तीसरे और फर्जी सिम के मामलों में गिरिडीह दसवें स्थान पर

Jharkhand Cyber Crime Alert: Four Districts Among India’s Top 15, Deoghar Ranks Third
रांची, 19 अक्टूबर 2026 | अबुआ न्यूज़ झारखंड
Jharkhand Cyber Crime News: साइबर अपराध के मामले में झारखंड एक बार फिर चर्चा में है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, देश के साइबर अपराध से प्रभावित शीर्ष 15 जिलों की सूची में झारखंड के चार जिलों का नाम सामने आया है। इनमें देवघर तीसरे स्थान पर बताया गया है, जबकि गिरिडीह फर्जी सिम कार्ड से जुड़े मामलों में दसवें स्थान पर है। यह स्थिति झारखंड में साइबर अपराध के बढ़ते नेटवर्क और डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़ी चुनौतियों की ओर ध्यान खींचती है।
हालांकि, इस रैंकिंग का मूल डेटा, अध्ययन अवधि और चारों जिलों के नाम अभी स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हैं। इसलिए उपलब्ध जानकारी को प्रकाशित रिपोर्ट के दावे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
देवघर देश के साइबर अपराध प्रभावित जिलों में तीसरे स्थान पर
झारखंड का देवघर जिला लंबे समय से साइबर ठगी से जुड़ी गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है। विशेष रूप से ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, फर्जी ग्राहक सेवा नंबर, OTP के जरिए ठगी और डिजिटल भुगतान से जुड़े फ्रॉड जैसे मामलों ने पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी की है।
हालिया प्रकाशित रिपोर्ट में देवघर को देश के साइबर अपराध से जुड़े शीर्ष जिलों में तीसरा स्थान मिलने का दावा किया गया है।
देवघर और आसपास के क्षेत्रों में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस समय-समय पर अभियान चलाती रही है। संदिग्ध मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों और डिजिटल उपकरणों की जांच साइबर अपराध से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फर्जी सिम कार्ड के मामलों में गिरिडीह दसवें स्थान पर
झारखंड के गिरिडीह जिले को फर्जी सिम कार्ड से जुड़े मामलों की रिपोर्ट में देश के दसवें स्थान पर बताया गया है।
साइबर अपराध में फर्जी दस्तावेजों से प्राप्त सिम कार्ड का इस्तेमाल एक गंभीर समस्या है। अपराधी ऐसे मोबाइल नंबरों के जरिए लोगों को बैंक अधिकारी, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि या सरकारी कर्मचारी बनकर फोन कर सकते हैं।
कई मामलों में धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत पाए जाते हैं। इससे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फर्जी सिम कार्ड के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई साइबर ठगी रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
झारखंड के चार जिलों का नाम सामने आने से बढ़ी चिंता
प्रकाशित रिपोर्ट में झारखंड के चार जिलों के शीर्ष 15 में शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में देवघर और गिरिडीह के अलावा अन्य दो जिलों के नाम स्पष्ट नहीं हैं।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि साइबर अपराध की कुल शिकायतों, अपराधियों के ठिकानों और फर्जी सिम कार्ड के इस्तेमाल की रैंकिंग अलग-अलग मानकों पर तैयार हो सकती है।
इसलिए देवघर की तीसरी रैंक और गिरिडीह की दसवीं रैंक को एक ही श्रेणी की रैंकिंग मानकर तुलना करना उचित नहीं होगा।
साइबर अपराधी कैसे बनाते हैं लोगों को निशाना?
डिजिटल लेनदेन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। अपराधी तकनीक और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
साइबर ठगी के प्रमुख तरीके इस प्रकार हैं:
- फर्जी बैंक कॉल: बैंक खाता बंद होने या KYC अपडेट के नाम पर OTP और निजी जानकारी मांगना।
- डिजिटल अरेस्ट स्कैम: पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का डर दिखाना और पैसे वसूलना।
- फर्जी निवेश योजनाएं: कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर रकम जमा कराना।
- नकली ग्राहक सेवा नंबर: इंटरनेट पर फर्जी हेल्पलाइन नंबर डालकर लोगों से बैंकिंग जानकारी लेना।
- फर्जी लिंक और APK फाइल: संदिग्ध लिंक या मोबाइल ऐप के जरिए संवेदनशील जानकारी चुराना।
- नौकरी और लॉटरी फ्रॉड: नौकरी, पुरस्कार या सरकारी लाभ के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस मांगना।
साइबर अपराध रोकने के लिए पुलिस की चुनौती
झारखंड पुलिस और साइबर अपराध से जुड़ी जांच एजेंसियों के सामने केवल अपराधियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उनके वित्तीय और डिजिटल नेटवर्क का पता लगाना भी बड़ी चुनौती है।
साइबर अपराध के मामलों में मोबाइल नंबर, बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट, इंटरनेट कनेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।
इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में सक्रिय अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस एजेंसियों के बीच समन्वय भी आवश्यक है।
साइबर अपराध से निपटने के लिए तकनीकी जांच, डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण और आम नागरिकों के बीच जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत करें शिकायत
यदि किसी व्यक्ति के बैंक खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसे निकाल लिए जाते हैं या वह ऑनलाइन ठगी का शिकार होता है, तो तत्काल शिकायत करना जरूरी है।
भारत सरकार ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 उपलब्ध कराया है।
इसके अलावा नागरिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
समय पर शिकायत दर्ज कराने से संबंधित बैंक और जांच एजेंसियों को कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, धनराशि वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, ATM PIN, UPI PIN या इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए।
अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध मोबाइल ऐप डाउनलोड करने और सोशल मीडिया पर मिलने वाले निवेश प्रस्तावों में पैसा लगाने से पहले उनकी प्रामाणिकता जांचना जरूरी है।
यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देता है और पैसे मांगता है, तो ऐसी कॉल पर भरोसा न करें। भारत में पुलिस द्वारा वीडियो कॉल के जरिए पैसे लेकर तथाकथित डिजिटल अरेस्ट से मुक्त करने की कोई वैध प्रक्रिया नहीं है।
झारखंड के लिए साइबर सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
देश के साइबर अपराध से प्रभावित जिलों की सूची में झारखंड के चार जिलों के शामिल होने का दावा राज्य की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
देवघर और गिरिडीह से जुड़ी रिपोर्टें यह संकेत देती हैं कि साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ फर्जी सिम कार्ड, संदिग्ध बैंक खातों और डिजिटल धोखाधड़ी के नेटवर्क पर भी निगरानी जरूरी है।
साइबर अपराध केवल पुलिस की चुनौती नहीं, बल्कि आम नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी है।
डिजिटल लेनदेन के इस दौर में सतर्कता, जागरूकता और समय पर शिकायत ही साइबर अपराध से बचाव के सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं।
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