
अभुआ न्यूज़ झारखंड | विशेष रिपोर्ट
भारत ने स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने देश के पहले फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari भी उपस्थित रहे।
यह वाहन Maruti Suzuki द्वारा विकसित किया गया है और यह E20 से लेकर E100 तक विभिन्न इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों पर चल सकता है। फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के जरिए वाहन ईंधन में मौजूद इथेनॉल की मात्रा के अनुसार स्वयं को अनुकूलित कर लेता है।
मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का आगमन केवल एक नए वाहन का लॉन्च नहीं है, बल्कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन के नए अध्याय की शुरुआत है। उनका मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ाने, पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में इथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देकर विदेशी मुद्रा की बचत की जा सकती है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को और बढ़ाना है ताकि देश ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बन सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के व्यापक उपयोग से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ेगी। इससे किसानों को अपनी फसलों का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है। साथ ही, इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है।
सरकार का दावा है कि भारत में लगभग 37 लाख से अधिक यात्री वाहन हैं और यदि बड़े पैमाने पर फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अपनाई जाती है तो देश के परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि हरित परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देशभर में इथेनॉल की उपलब्धता और वितरण नेटवर्क कितना मजबूत बनाया जाता है। यदि यह पहल सफल होती है तो भारत स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन की दिशा में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है।



