अमेरिका के नए टैरिफ पर भारत सतर्क, 38 देशों से कम ड्यूटी के बावजूद जारी रहेगी बातचीत

नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा घोषित नए व्यापारिक टैरिफ को लेकर भारत सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार के अनुसार, अमेरिका ने ‘सेक्शन 301’ के तहत भारत पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाया है, जो चीन, रूस, ब्राजील समेत 38 अन्य देशों पर लगाए गए 12.5% टैरिफ से कम है। इसके बावजूद भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि यह टैरिफ जबरन मजदूरी (Forced Labour) से जुड़े आरोपों के आधार पर लागू किए गए सेक्शन 301 उपायों के तहत लगाया गया है। हालांकि, अमेरिका को भारत के कुल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा इस अतिरिक्त ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेगा, जबकि शेष 55 प्रतिशत निर्यात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू होगा।
सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा। मंत्रालय का कहना है कि लगातार बातचीत और जांच प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के कारण भारत को अन्य कई देशों की तुलना में कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने 23 जुलाई को अंतिम टैरिफ उपायों की घोषणा की। इसमें भारत पर लगाया गया 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क, पहले प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत की तुलना में कम है। सरकार ने बताया कि जांच प्रक्रिया के दौरान भारत ने लिखित जवाब, आमने-सामने वार्ता और सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेकर अपना पक्ष मजबूती से रखा।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कई प्रमुख भारतीय उत्पाद अभी भी अतिरिक्त टैरिफ से बाहर हैं। इनमें जेनेरिक दवाइयां, स्मार्टफोन और कुछ अन्य विशेष उत्पाद शामिल हैं। वहीं स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स जैसे उत्पाद पहले से सेक्शन 232 के तहत अलग शुल्क व्यवस्था में आते हैं। हालांकि भारत पर टैरिफ दर अन्य 38 देशों से कम है, लेकिन टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र को मिलने वाली टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) की विशेष छूट भारत को नहीं मिली है। यह सुविधा फिलहाल बांग्लादेश, कंबोडिया, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों को उपलब्ध है।
सरकार ने कहा कि टेक्सटाइल से जुड़े प्रस्तावित तंत्र को अभी पूरी तरह लागू किया जाना बाकी है। भारत इस विषय पर भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। सरकार का लक्ष्य जल्द से जल्द व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना और दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करना है।

