
Fast Track Court: पेपर लीक मामलों की सुनवाई अब फास्ट-ट्रैक कोर्ट में, PM मोदी ने किया ऐलान
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर बढ़ती चिंता के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए Fast Track Court स्थापित किए जाएंगे, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके । प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा ।
Fast Track Court क्या होते हैं
Fast Track Court विशेष अदालतें होती हैं जिन्हें विशिष्ट श्रेणी के मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई और निपटान के लिए बनाया जाता है । ये कोई नई कानूनी अदालतें नहीं हैं, बल्कि नियमित अदालतों को विशेष रूप से कुछ प्रकार के मामलों को संभालने के लिए नामित किया जाता है । Fast Track Court में समर्पित न्यायाधीश, विशेष केस लिस्ट, सरल शेड्यूलिंग और कम स्थगन के साथ निरंतर सुनवाई होती है । इनका उद्देश्य त्वरित सुनवाई और निर्णय सुनिश्चित करके न्याय में देरी को कम करना है ।
Fast Track Court कैसे काम करते हैं
Fast Track Court की स्थापना और संचालन राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है, जो अपने संबंधित उच्च न्यायालयों के परामर्श से काम करती हैं । राज्य सरकारें इन अदालतों के लिए धन आवंटित करने के लिए भी जिम्मेदार हैं । केंद्र सरकार नीति, वित्तीय सहायता प्रदान कर सकती है और राज्यों से Fast Track Court स्थापित करने का आग्रह कर सकती है, लेकिन उनका निर्माण, स्टाफिंग और कामकाज अंततः राज्य सरकारों और न्यायपालिका पर निर्भर करता है ।
Fast Track Court के न्यायाधीशों और अदालती कर्मचारियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और संबंधित उच्च न्यायालयों की होती है । जिला अदालतों और अधीनस्थ अदालतों पर प्रशासनिक नियंत्रण उच्च न्यायालयों का होता है, जो संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत न्यायिक अधिकारियों की पोस्टिंग और पदोन्नति को नियंत्रित करता है ।
Fast Track Court का इतिहास
भारत ने 2000 में 11वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद पहली बार Fast Track Court की शुरुआत की थी, ताकि आपराधिक मामलों के बढ़ते बैकलॉग से निपटा जा सके । 2012 के निर्भया कांड के बाद इन अदालतों ने एक नई पहचान बनाई और यौन अपराधों, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों तथा POCSO अधिनियम के तहत मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतों के रूप में विकसित हुईं ।
सरकार ने 2019 में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना शुरू की, जिसके तहत 790 अदालतों को मंजूरी दी गई, जिनमें 410 विशेष POCSO अदालतें शामिल हैं । इस योजना को 2026 तक जारी रखा गया है और 2024 तक 755 अदालतें परिचालन में हैं, जिन्होंने 2.53 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है ।
Fast Track Court में कितने मामलों का निपटारा हुआ
Fast Track Court ने यौन अपराधों और POCSO मामलों के त्वरित निपटान में महत्वपूर्ण सफलता दिखाई है । कुछ उल्लेखनीय उदाहरणों में शामिल हैं :
बिहार के अररिया में एक POCSO अदालत ने छह वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में चार दिनों में मुकदमा पूरा किया और दोषी को मौत की सजा सुनाई।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक POCSO अदालत ने आरोप तय होने के 24 दिनों के भीतर बलात्कार के प्रयास के मामले में सात साल की सजा सुनाई।
कर्नाटक और केरल में भी FTSC ने क्रमशः 90 और 109 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा किया। हालांकि, FTSC को संसाधन सीमाओं, अकुशल जांच और न्यायपालिका में अपर्याप्त स्टाफ जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है । कई राज्यों में संख्या में भारी अंतर है – जबकि महाराष्ट्र 80% निपटान दर प्राप्त करता है, पश्चिम बंगाल केवल 2% निपटान दर के साथ 123 में से केवल 3 अदालतें संचालित करता है ।
Fast Track Court का पेपर लीक से क्या संबंध
जुलाई 2026 में, NEET पेपर लीक विवाद के कारण देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और विपक्षी दलों तथा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच, प्रधानमंत्री ने पेपर लीक मामलों के लिए Fast Track Court स्थापित करने की घोषणा की । यह घोषणा 2026 के संसद के मानसून सत्र के दौरान की गई । Fast Track Court पेपर लीक मामलों को प्राथमिकता देंगे, सुनवाई से पहले प्रतीक्षा समय कम करेंगे, लगातार सुनवाई करेंगे, अनावश्यक स्थगन को कम करेंगे और त्वरित निर्णय सुनिश्चित करेंगे ।
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों के लिए त्वरित और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए Fast Track Court स्थापित करने का फैसला किया है। जो लोग हमारे युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा” ।
सख्त कानून के बाद अब तेज सुनवाई
सरकार पहले ही पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लागू कर चुकी है । अब Fast Track Court के गठन से पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा किया जाएगा । इस फैसले का स्वागत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई केंद्रीय नेताओं ने कहा कि इससे परीक्षा घोटालों पर प्रभावी रोक लगेगी और युवाओं का भरोसा मजबूत होगा ।
बाहरी संसाधन
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट: https://lawministry.gov.in
Fast Track Court के बारे में अधिक जानकारी के लिए सरकारी पोर्टल देखें।
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