Fake Documents in Voter Verification? Strict Legal Action Ordered
झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के दौरान फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) रवि कुमार ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों और उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि यदि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कोई व्यक्ति फर्जी प्रमाण पत्र बनाते या उनका उपयोग करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध संबंधित कानूनी धाराओं के तहत तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
निर्वाचन विभाग की ओर से गुरुवार को जारी पत्र में कहा गया है कि हाल ही में पाकुड़ जिले में एक फर्जी वेबसाइट के माध्यम से जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए जाने का मामला सामने आया है। इससे पहले भी गोड्डा समेत अन्य जिलों से ऐसे मामलों की सूचनाएं मिल चुकी हैं। इन घटनाओं को देखते हुए पूरे राज्य में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
सभी दस्तावेजों का होगा कड़ा सत्यापन
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि SIR के दौरान मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए जमा किए जाने वाले सभी दस्तावेजों की गहन जांच की जाए। यदि किसी भी दस्तावेज में फर्जीवाड़ा या धोखाधड़ी की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और त्रुटिरहित रहे।
राजनीतिक दलों के साथ हुई समीक्षा बैठक
गुरुवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रवि कुमार की अध्यक्षता में निर्वाचन सदन में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में SIR कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न सवालों और शंकाओं का पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से समाधान किया गया। अधिकारियों ने अभियान की पूरी प्रक्रिया और समय-सीमा की जानकारी साझा की।
जानिए SIR का पूरा शेड्यूल
निर्वाचन विभाग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार:
- 20 जून से 29 जून: प्रशिक्षण एवं मुद्रण कार्य
- 30 जून से 29 जुलाई: BLO घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म वितरित करेंगे।
- 5 अगस्त: प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची का प्रकाशन
- 5 अगस्त से 4 सितंबर: दावे एवं आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी।
- 7 अक्टूबर 2026: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
फर्जीवाड़े पर जीरो टॉलरेंस
निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधित करने या अन्य किसी प्रकार की धोखाधड़ी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी जिला प्रशासन को ऐसे मामलों में सतर्क रहने और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।


