छोटे शहरों के छात्रों को एजुकेशन लोन का सहारा, 86% से ज्यादा आवेदन टियर-2 और टियर-3 शहरों से

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कुहू फाइनेंस की रिपोर्ट में सामने आया ट्रेंड, 2025-26 के दौरान 2.5 लाख से अधिक आवेदन; करीब ₹7,500 करोड़ के लोन की मांग

नयी दिल्ली। देश में उच्च शिक्षा और रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रमों की बढ़ती लागत के बीच एजुकेशन लोन छात्रों और उनके परिवारों के लिए अहम वित्तीय सहारा बनता जा रहा है। खास बात यह है कि अब शिक्षा के लिए कर्ज लेने का ट्रेंड केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों के छात्र भी प्रोफेशनल और रोजगार-केंद्रित कोर्स के लिए एजुकेशन लोन का सहारा ले रहे हैं।

शिक्षा वित्तपोषण प्लेटफॉर्म कुहू फाइनेंस के जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच के आंकड़ों के मुताबिक, उसके पास आए एजुकेशन लोन आवेदनों में 86.5 प्रतिशत हिस्सेदारी टियर-2 और टियर-3 शहरों की रही। वहीं, टियर-1 शहरों से सिर्फ 13.5 प्रतिशत आवेदन आए।

रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में प्लेटफॉर्म को 2.5 लाख से अधिक एजुकेशन लोन आवेदन मिले। इन आवेदनों में करीब 7,500 करोड़ रुपये के एजुकेशन लोन की मांग की गयी।

छोटे शहरों में शिक्षा को भविष्य की कमाई से जोड़ रहे छात्र

रिपोर्ट में कहा गया है कि छोटे शहरों के विद्यार्थी अब उच्च शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने के तौर पर नहीं, बल्कि बेहतर रोजगार और भविष्य की आय के अवसर के रूप में देख रहे हैं। महंगे प्रोफेशनल कोर्स की फीस एक साथ चुकाना कई परिवारों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में एजुकेशन लोन छात्रों को अपनी पसंद के पाठ्यक्रम में दाखिला लेने में मदद कर रहा है।

यूपी सबसे आगे, बिहार भी टॉप-5 में

राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा। कुल एजुकेशन लोन आवेदनों में यूपी की हिस्सेदारी 12.87 प्रतिशत रही। इसके बाद महाराष्ट्र 12.52 प्रतिशत, कर्नाटक 7.16 प्रतिशत, बिहार 6.91 प्रतिशत और तमिलनाडु 6.77 प्रतिशत के साथ प्रमुख राज्यों में रहे।

टॉप-10 राज्यों में आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और राजस्थान भी शामिल हैं।

जॉब ट्रेनिंग और MBA की सबसे ज्यादा मांग

एजुकेशन लोन के इस्तेमाल के मामले में रोजगार-केंद्रित पाठ्यक्रमों की मांग सबसे ज्यादा दिखाई दी। रिपोर्ट के मुताबिक, जॉब ट्रेनिंग प्रोग्राम की हिस्सेदारी 41.7 प्रतिशत रही। इसके बाद MBA की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत रही।वहीं, ऑनलाइन कोर्स के लिए 9.8 प्रतिशत, इंजीनियरिंग के लिए 5.5 प्रतिशत और मेडिकल शिक्षा के लिए 4.7 प्रतिशत लोन वितरण हुआ।

स्किल आधारित शिक्षा पर बढ़ रहा जोर

आंकड़े बताते हैं कि छात्र अब ऐसे पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनसे उन्हें सीधे रोजगार या बेहतर करियर के अवसर मिल सकें। जॉब ट्रेनिंग और MBA जैसे कोर्स के लिए एजुकेशन लोन की बड़ी हिस्सेदारी इसी बदलती प्राथमिकता की ओर इशारा करती है।

छोटे शहरों में बढ़ती शिक्षा संबंधी वित्तीय जरूरत और रोजगार-केंद्रित पाठ्यक्रमों की मांग आने वाले समय में एजुकेशन लोन बाजार को और विस्तार दे सकती है।

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