Mamata Banerjee के लिए संकट गहराया, एक महीने पुरानी प्रदेश अध्यक्ष ने छोड़ा साथ
पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा भूचाल आ गया है। Mamata Banerjee को तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। ताजा मामला है पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा, जिन्होंने महज एक महीने पहले ही यह जिम्मेदारी संभाली थी। इस कदम ने पार्टी के भीतर पहले से मौजूद संकट को और गहरा कर दिया है।
क्यों दिया Chandrima Bhattacharya ने इस्तीफा?
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने Mamata Banerjee को लिखे अपने इस्तीफे में साफ किया कि उनकी निष्ठा और भरोसे पर सवाल उठाए जाने के बाद उनके लिए पद पर बने रहना संभव नहीं था। असल वजह यह थी कि 3 जुलाई को बागी गुट ने TMC के मुख्यालय ‘तृणमूल भवन’ पर कब्जा कर लिया, और इसके बाद Mamata Banerjee ने फोन पर चंद्रिमा को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने यह इमारत बागियों को ‘सौंप दी’ है। इस बात से वह बहुत आहत हुईं और उन्होंने तुरंत पद छोड़ने का फैसला कर लिया।
इस्तीफे के बाद चंद्रिमा ने कहा, “जब आपकी विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए जाएं, तो फिर उस स्थिति में वापसी का कोई सवाल नहीं उठता।”
Mamata Banerjee का पलटवार और नई कमान
इस्तीफे के बाद Mamata Banerjee ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने एक फेसबुक लाइव सेशन में बागियों को ‘गद्दार’ करार दिया और उन्हें खुली चुनौती दी कि अगर हिम्मत है तो सीधे भाजपा में शामिल हो जाएं। Mamata Banerjee ने यह भी ऐलान किया कि अब वह खुद TMC की प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगी। साथ ही, उन्होंने कुणाल घोष और मदन मित्रा को पार्टी के नए महासचिव नियुक्त किया।
TMC में क्यों मचा है बवाल?
Mamata Banerjee की मुश्किलें मई 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद शुरू हुईं। पार्टी के 80 विधायकों में से 58 ने बागी रुख अपना लिया और ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बना दिया। इसके अलावा, 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने भी अलग होकर NDA का समर्थन करने का फैसला किया।
अब दोनों गुट पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घास फूल’ और पार्टी मुख्यालय पर दावा कर रहे हैं, और यह मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। Mamata Banerjee की पार्टी, जो कभी पूरी तरह उनके करिश्मे पर टिकी थी, अब अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।
आगे क्या होगा?
| पहलू | संभावित परिणाम |
|---|---|
| चुनाव आयोग | दोनों गुटों में से किसी एक को TMC का चुनाव चिह्न मिल सकता है |
| कोलकाता नगर निगम चुनाव | यह चुनाव तय करेगा कि किस गुट के पास जमीनी ताकत है |
| कानूनी लड़ाई | Mamata Banerjee गुट चुनाव आयोग और अदालत में मामला लड़ रहा है |
यह Mamata Banerjee के राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा संकट है, जहां उन्हें अपनी ही पार्टी में विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है।


