बहरीन में US Navy को बड़ा झटका! Fifth Fleet के अहम बेस पर हमला, खाड़ी में बढ़ा तनाव

0
41
बहरीन में US Navy को बड़ा झटका! Fifth Fleet के अहम बेस पर हमला, खाड़ी में बढ़ा तनाव
बहरीन में US Navy को बड़ा झटका! Fifth Fleet के अहम बेस पर हमला, खाड़ी में बढ़ा तनाव
Share This Post

मनामा: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच बहरीन स्थित अमेरिका के महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डे Naval Support Activity Bahrain को ईरानी हमलों से नुकसान पहुंचने की खबर ने दुनिया का ध्यान खाड़ी क्षेत्र की ओर खींच दिया है। यह सैन्य ठिकाना अमेरिकी नौसेना की Fifth Fleet का मुख्यालय है और फारस की खाड़ी तथा आसपास के समुद्री इलाकों में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

अमेरिकी नौसेना की ओर से सामने आई जानकारी के बाद इस हमले और उससे हुए नुकसान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बहरीन का यह बेस केवल अमेरिकी सैनिकों की तैनाती का केंद्र नहीं है, बल्कि यहां से समुद्री निगरानी, लॉजिस्टिक्स, जहाजों की सहायता और क्षेत्रीय नौसैनिक अभियानों का संचालन किया जाता है।

ऐसे में इस ठिकाने पर हमला अमेरिका के लिए एक बड़ा सामरिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

आखिर क्यों इतना महत्वपूर्ण है बहरीन का अमेरिकी बेस?

बहरीन आकार में छोटा देश है, लेकिन उसकी भौगोलिक स्थिति उसे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

यहां अमेरिकी नौसेना की Fifth Fleet का मुख्यालय स्थित है। Fifth Fleet की जिम्मेदारी फारस की खाड़ी, अरब सागर और आसपास के महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में अमेरिकी नौसैनिक हितों और अभियानों की निगरानी करना है।

इस क्षेत्र की सबसे बड़ी रणनीतिक अहमियत Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।

यही कारण है कि बहरीन में अमेरिकी नौसैनिक ढांचे पर किसी भी बड़े हमले का असर केवल सैन्य समीकरणों तक सीमित नहीं रहता। इसका संबंध अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार से भी जुड़ जाता है।

ईरान-अमेरिका टकराव के बीच हमला

बहरीन के घटनाक्रम को अमेरिका और ईरान के बीच जारी व्यापक तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई है।

ईरान लंबे समय से पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का विरोध करता रहा है। वहीं अमेरिका अपने सैन्य ठिकानों और नौसैनिक बेड़े को क्षेत्र में सुरक्षा तथा समुद्री मार्गों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण बताता है।

अब बहरीन में अमेरिकी नौसैनिक सुविधा को नुकसान पहुंचने से यह सवाल और गंभीर हो गया है कि यदि संघर्ष आगे बढ़ता है तो खाड़ी क्षेत्र में मौजूद दूसरे सैन्य प्रतिष्ठान भी निशाने पर आ सकते हैं या नहीं।

Fifth Fleet की भूमिका क्या है?

US Fifth Fleet अमेरिकी नौसेना की सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कमानों में से एक है।

इसकी जिम्मेदारी वाले समुद्री क्षेत्र में दुनिया के कई महत्वपूर्ण व्यापार और ऊर्जा मार्ग आते हैं। अमेरिकी नौसेना यहां समुद्री सुरक्षा, सैन्य निगरानी, जहाजों की आवाजाही और अपने सहयोगी देशों के साथ अभियानों का संचालन करती है।

बहरीन स्थित मुख्यालय इसी पूरी व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

इसलिए बेस को नुकसान पहुंचने की खबर का रणनीतिक महत्व सामान्य सैन्य ठिकाने पर हमले से कहीं अधिक है।

होर्मुज पर दुनिया की नजर

बहरीन में हुए घटनाक्रम के बाद एक बार फिर Strait of Hormuz चर्चा के केंद्र में है।

अगर इस क्षेत्र में सैन्य संघर्ष बढ़ता है और समुद्री जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

तेल टैंकरों की आवाजाही में बाधा, बीमा लागत में बढ़ोतरी या समुद्री मार्ग को लेकर सुरक्षा संबंधी आशंकाएं भी ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

यही कारण है कि अमेरिका-ईरान तनाव को दुनिया केवल सैन्य संघर्ष के नजरिए से नहीं देख रही। इसका सीधा संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था से भी है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?

खाड़ी क्षेत्र में होने वाला कोई भी बड़ा सैन्य घटनाक्रम भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। पश्चिम एशिया भारत के लिए तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख क्षेत्र है।

अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो भारत का आयात बिल प्रभावित हो सकता है। महंगा कच्चा तेल परिवहन लागत और महंगाई पर भी दबाव बढ़ा सकता है।

इसके अलावा बहरीन और दूसरे खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। इसलिए क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण विषय बन जाती है।

क्या खाड़ी में संघर्ष और फैल सकता है?

सबसे बड़ी चिंता यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव कहीं दूसरे देशों तक न फैल जाए।

पश्चिम एशिया के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने या अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। ऐसे में यदि हमले और जवाबी हमले लगातार बढ़ते हैं तो क्षेत्रीय अस्थिरता और गंभीर हो सकती है।

बहरीन की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि वह अमेरिकी नौसेना के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

अब अमेरिका के सामने अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा मजबूत करने और क्षेत्र में अपनी रणनीति को आगे बढ़ाने की चुनौती है।

बदल सकती है खाड़ी की सैन्य रणनीति

इस तरह के हमले आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को भी दिखाते हैं। मिसाइल और ड्रोन तकनीक ने बड़े और स्थायी सैन्य ठिकानों के सामने नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर दी हैं।

महंगे सैन्य अड्डे, एयरबेस और नौसैनिक सुविधाएं अब लंबी दूरी के हथियारों के संभावित निशाने बन सकते हैं।

इसलिए आने वाले समय में अमेरिका अपने क्षेत्रीय सैन्य ढांचे, एयर डिफेंस सिस्टम और नौसैनिक लॉजिस्टिक्स की समीक्षा कर सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर है।

अगर दोनों तरफ से सैन्य कार्रवाई बढ़ती है तो इसका असर बहरीन या किसी एक अमेरिकी सैन्य अड्डे तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया, अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

दूसरी ओर यदि कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिश सफल होती है तो स्थिति को व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने से रोका जा सकता है।

बहरीन स्थित Fifth Fleet के मुख्यालय को नुकसान पहुंचने की खबर ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा तनाव में खाड़ी क्षेत्र एक बेहद संवेदनशील सैन्य और आर्थिक क्षेत्र बन चुका है।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here