
AI Device: रांची के 17 साल के छात्र ने बनाया ‘इनोबॉक्स’, हाथी आते ही बजेगा अलार्म, पलामू में ट्रायल
AI Device: रांची के 17 साल के छात्र ने बनाया ‘इनोबॉक्स’, हाथी आते ही बजेगा अलार्म, पलामू में ट्रायल
झारखंड में इंसान और हाथियों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए अब तकनीक की मदद ली जा रही है। इसी दिशा में रांची के 17 वर्षीय छात्र अवि मोहन शुक्ला ने एक ऐसा AI Device तैयार किया है, जो आसपास हाथियों की मौजूदगी का पता लगाकर समय रहते अलर्ट कर सकता है। इस AI Device का नाम ‘इनोबॉक्स’ रखा गया है। खास बात यह है कि यह सिस्टम इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी काम कर सकता है। वन विभाग ने इस AI Device का ट्रायल पलामू टाइगर रिजर्व में शुरू किया है।
AI Device: गांव में समस्या देखकर आया आइडिया
अवि रांची के लेडी केसी राय मेमोरियल स्कूल में 12वीं कक्षा के छात्र हैं। साल 2024 में वह आईआईएम रांची के यंग चेंजमेकर्स कार्यक्रम के दौरान रासाबेड़ा गांव पहुंचे थे। रांची से करीब 45 किलोमीटर दूर इस गांव में ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि हाथियों के कारण फसलों को होने वाला नुकसान बड़ी समस्या है।
खासकर आदिवासी परिवारों के साथ बातचीत के बाद अवि ने इस समस्या पर काम करना शुरू किया। उन्होंने सोचा कि अगर हाथियों के गांव की तरफ आने की जानकारी पहले ही मिल जाए, तो ग्रामीण और वन विभाग समय रहते सावधानी बरत सकते हैं। इसी सोच से इस AI Device को तैयार करने का काम शुरू हुआ।
AI Device: कैसे काम करता है ‘इनोबॉक्स’?
सौर ऊर्जा से चलने वाला यह AI Device मुख्य रूप से इंफ्रारेड सेंसर की मदद से काम करता है। यह इंसान, मवेशी और दूसरे जानवरों के बीच अंतर करने में सक्षम है।
यह AI Device हाथियों के पैरों की वजह से जमीन में पैदा होने वाले भूकंपीय कंपन को भी पहचान सकता है। जैसे ही हाथी की मौजूदगी का पता चलता है, AI Device अलार्म बजाता है और SMS के जरिए अलर्ट भेजता है।
इसके अलावा कैमरे से हाथी की तस्वीर भी मिल सकती है। हाथी किस जगह और किस समय दिखाई दिया, इसकी जानकारी भी यह AI Device रिकॉर्ड करता है।
AI Device: वन विभाग तक पहुंचेगा तुरंत अलर्ट
इस AI Device को वेब डैशबोर्ड और मोबाइल फोन से भी जोड़ा गया है। इससे वन अधिकारियों को हाथियों की गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सकती है।
अवि ने अपनी तकनीक के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए वन विभाग से सहयोग मांगा था। उनका पोस्ट वन विभाग के मुख्य वन प्रतिपालक रवि रंजन की नजर में आया। इसके बाद उन्होंने अवि से संपर्क कर तकनीक का डेमो देखा।
तकनीक को आगे विकसित करने के लिए वन विभाग की ओर से एक लाख रुपये की मदद दी गई। साथ ही पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10 AI Device तैयार करने की जिम्मेदारी भी अवि को दी गई।
AI Device: पलामू में 3-4 महीने से चल रहा ट्रायल
फिलहाल इस AI Device का ट्रायल पलामू टाइगर रिजर्व में पिछले तीन से चार महीने से चल रहा है। अभी तक के ट्रायल में लगाए गए उपकरणों से 80 फीसदी से अधिक सफलता मिलने का दावा किया गया है। इन AI Device की मदद से पलामू क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
AI Device: ट्रायल सफल हुआ तो रांची में लगेंगे 10 डिवाइस
वन विभाग अब ट्रायल के अंतिम परिणाम का इंतजार कर रहा है। अगर तकनीक उम्मीद के मुताबिक सफल रहती है, तो रांची और आसपास के इलाकों में 10 AI Device लगाए जाने की योजना है।
पीसीसीएफ, वन्य प्राणी रवि रंजन के अनुसार, वन विभाग ने अवि की तकनीक का प्रस्तुतीकरण और लाइव डेमो देखा है। अब अंतिम ट्रायल रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
अगर यह AI Device बड़े स्तर पर सफल होता है, तो हाथियों की मौजूदगी की जानकारी पहले मिलने से ग्रामीणों और वन विभाग को समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
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