
France Protest 2026: महंगाई के खिलाफ फ्रांस में महाविरोध, पेरिस की सड़कों पर आगजनी और लूटपाट, 1200 से ज्यादा गिरफ्तार

France on the Boil: Massive Protests Rock Paris, Over 1,200 Arrested Amid Violent Clashes
पेरिस/नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026 | अबुआ न्यूज़ झारखंड
France Protest 2026: यूरोपीय देश फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। राजधानी पेरिस सहित कई बड़े शहरों में 17 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देशभर में 1200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और कम से कम 150 पुलिसकर्मी घायल हुए।
फ्रांस में शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।
पेरिस से लियोन तक हिंसा, कई सरकारी इमारतों को नुकसान
फ्रांस की राजधानी पेरिस में शनिवार को हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं।
पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कई इलाकों में वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, दुकानों में लूटपाट हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
पेरिस के अलावा मार्सेय, लियोन और लिमोज जैसे शहरों में भी हिंसा की घटनाएं सामने आईं। लिमोज में टाउन हॉल आग से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ, जबकि लियोन में पर्यटन कार्यालय को निशाना बनाया गया।
पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने शहर के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर नुकसान होने की बात कही है।
5.5 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर, गिरफ्तारी का आंकड़ा बढ़ा
फ्रांस में 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में सरकारी अनुमान के अनुसार लगभग 5.5 लाख लोगों ने भाग लिया। वहीं, प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों ने यह संख्या करीब आठ लाख बताई।
अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कई स्थानों पर हिंसक समूहों की गतिविधियों के कारण स्थिति बिगड़ गई।
18 अक्टूबर की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तार लोगों की संख्या 1200 से अधिक बताई गई है। हालांकि, अलग-अलग समय पर जारी पुलिस और मीडिया आंकड़ों में अंतर देखने को मिला है।
आखिर क्यों भड़का फ्रांस में जनआक्रोश?
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा मुद्दा लगातार बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत है। आम नागरिकों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना कठिन होता जा रहा है।
इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था की खराब स्थिति, शिक्षकों की कमी, सार्वजनिक सेवाओं में संसाधनों का अभाव और सरकारी खर्च में कटौती की योजनाओं ने भी लोगों की नाराजगी बढ़ाई है।
शुरुआत में यह आंदोलन मुख्य रूप से छात्रों और युवाओं की मांगों से जुड़ा था। बाद में श्रमिक संगठनों और अन्य सामाजिक समूहों ने भी इसका समर्थन किया।
राष्ट्रपति मैक्रों ने हिंसा की निंदा की
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा, आगजनी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की निंदा की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानमंत्री सेबास्तियां लेकोर्नू ने भी हिंसा की निंदा करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया है।
क्या फिर लौट रहा है येलो वेस्ट आंदोलन?
फ्रांस में मौजूदा विरोध प्रदर्शनों की तुलना वर्ष 2018 में शुरू हुए प्रसिद्ध ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से भी की जा रही है।
उस समय ईंधन की बढ़ती कीमतों और आर्थिक असमानता के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे।
मौजूदा आंदोलन में भी महंगाई, सरकारी नीतियों और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। कई पुराने येलो वेस्ट समर्थक भी नए प्रदर्शनों में शामिल हुए हैं।
2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक चुनौती
फ्रांस में अप्रैल 2027 में राष्ट्रपति चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में देशभर में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों ने राजनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।
विपक्षी दल सरकार की आर्थिक और सामाजिक नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था बहाल करने और हिंसा रोकने की चुनौती का सामना कर रही है।
18 अक्टूबर का ताजा अपडेट
रविवार को फ्रांस के विभिन्न शहरों में शनिवार की हिंसा से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। पेरिस में क्षतिग्रस्त सड़कों, दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ी है।
अधिकारियों की नजर इस बात पर भी है कि विरोध प्रदर्शन अगले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
अबुआ न्यूज़ झारखंड की विशेष रिपोर्ट: फ्रांस में बढ़ते विरोध प्रदर्शन केवल महंगाई का मुद्दा नहीं रह गए हैं। यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था, आर्थिक असमानता, सार्वजनिक सेवाओं और सरकार के प्रति बढ़ते असंतोष को भी सामने ला रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और प्रदर्शनकारियों का रुख देश की राजनीतिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण होगा।




