
गांव में बिजली नहीं थी, बेटी ने अमेरिका में रचा इतिहास; 4 साल में पूरी की PhD, मास्टर्स में बनीं यूनिवर्सिटी टॉपर
बोकारो के कुम्हारडीह की श्वेताश्री ने University of Illinois Urbana से हासिल की डॉक्टरेट, BIT Mesra से गोल्ड मेडल के बाद अमेरिका में जारी रखा शोध का सफर

रांची। झारखंड के बोकारो जिले के छोटे से गांव कुम्हारडीह की श्वेताश्री ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कभी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझने वाले गांव से निकलकर श्वेताश्री ने अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से PhD पूरी की है। 17 मई को उन्होंने University of Illinois Urbana से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की।
श्वेताश्री की इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ उनके गांव और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। परिवार के मुताबिक, वह अपने गांव और आसपास के क्षेत्र की पहली बेटियों में हैं जिन्होंने डॉक्टरेट जैसी उच्च शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है।
चार साल में पूरी की PhD, कैंसर रिसर्च पर किया काम
श्वेताश्री ने महज चार वर्षों में अपनी PhD पूरी की। उनका शोध “Molecular Mechanism of KRAS4B Signaling” विषय पर रहा। इस शोध में कोशिकाओं के भीतर होने वाले सिग्नलिंग मैकेनिज्म और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े पहलुओं का अध्ययन किया गया।
उनके शोध-निर्देशक प्रो. स्लाइगर को अपने क्षेत्र का प्रतिष्ठित वैज्ञानिक बताया गया है। वह अमेरिका की National Academy of Sciences से भी जुड़े रहे हैं।
बेहतर पढ़ाई के लिए गांव छोड़ रांची आया परिवार
श्वेताश्री का शुरुआती जीवन कुम्हारडीह गांव में बीता। उस समय गांव में बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। इसके बावजूद परिवार ने उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी। बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने के लिए उनके माता-पिता गांव से रांची आकर बूटी मोड़ इलाके में रहने लगे। श्वेताश्री की शुरुआती पढ़ाई सुरेंद्रनाथ सेंटेनरी स्कूल, बूटी मोड़ से हुई।
उनकी दादी शकुंतला देवी पंचायत स्तर पर कन्या विद्यालय चलाती थीं। उन्होंने बचपन से ही श्वेताश्री को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया। वहीं उनके दादा दुर्गा प्रसाद साह ने भी उन्हें बड़े लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित किया।
BIT Mesra से मिला गोल्ड मेडल
स्कूली शिक्षा के बाद श्वेताश्री ने BIT Mesra से बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक की पढ़ाई की। यहां उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें गोल्ड मेडल मिला।
इसके बाद छात्रवृत्ति के जरिए उन्होंने Texas A&M University से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की। मास्टर्स के दौरान वह यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के शिकागो में रिसर्च का सफर आगे बढ़ाया और अंत में PhD की डिग्री हासिल की।
भाई भी IIT Delhi से पढ़े, अमेरिका में PhD का चयन
श्वेताश्री के परिवार में शिक्षा को हमेशा खास महत्व दिया गया है। उनके भाई अमन प्रकाश ने IIT Delhi से पढ़ाई की है और उनका चयन भी अमेरिका में PhD के लिए हुआ है। परिवार की इस शैक्षणिक पृष्ठभूमि को गांव और आसपास के लोग एक प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं। श्वेताश्री की सफलता से खासकर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिल रहा है।
कैंसर की सस्ती दवा विकसित करना है लक्ष्य
अपनी सफलता का श्रेय श्वेताश्री अपने माता-पिता को देती हैं। उनके पिता डॉ. ओम प्रकाश साहू का मानना रहा है कि बेटियों की शिक्षा और प्रगति से पूरा समाज आगे बढ़ता है। अब श्वेताश्री फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य कैंसर के इलाज के लिए ऐसी सस्ती और सुलभ दवाओं के विकास में योगदान देना है, जिससे इलाज आम लोगों की पहुंच से बाहर न हो।
श्वेताश्री का मानना है कि विज्ञान और रिसर्च का उद्देश्य केवल शोधपत्र प्रकाशित करना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक और समाधान विकसित करना होना चाहिए, जिसका फायदा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।




