झारखंड में मजदूर का बेटा बना साइबर ठगी का ‘गुरु’, करोड़ों की संपत्ति और लग्जरी लाइफ; 60 से ज्यादा युवाओं का नेटवर्क

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सारठ के मनीष पर फर्जी APK के जरिए साइबर ठगी का नेटवर्क चलाने का आरोप, 60 से अधिक युवाओं को जोड़कर ठगी की कमाई से कई शहरों में बनाई संपत्ति

देवघर: कभी परिवार का गुजारा मजदूरी और थोड़ी-सी खेती से चलता था, लेकिन करीब सात-आठ साल में एक युवक की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। आरोप है कि साइबर ठगी के धंधे में उतरने के बाद देवघर के सारठ इलाके का मनीष कुमार देखते ही देखते करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गया। पुलिस की जांच और सूत्रों से सामने आई जानकारी के मुताबिक, मनीष सिर्फ खुद ठगी नहीं करता था, बल्कि दूसरे युवाओं को भी साइबर अपराध का तरीका सिखाकर अपने नेटवर्क में जोड़ता था।

BPL परिवार से आलीशान जिंदगी तक का सफर

सारठ थाना क्षेत्र के पथरड्डा ओपी अंतर्गत उबिया गांव का रहने वाला मनीष कुमार एक बेहद साधारण परिवार से आता है। बताया जाता है कि उसके पिता मजदूरी करते थे और परिवार के पास खेती के लिए भी बहुत कम जमीन थी। आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि परिवार बीपीएल श्रेणी में आता था।

करीब सात-आठ साल पहले मनीष ने साइबर ठगी की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदलने लगी। आज उसके पास गांव में सुविधाओं से लैस मकान के अलावा कई जगहों पर संपत्ति होने की बात सामने आई है।

सूत्रों के मुताबिक, देवघर के अलावा दुमका, दुर्गापुर और कोलकाता में भी उसकी संपत्तियां हैं। उसके पास चार पहिया और दो पहिया वाहन भी हैं। यानी कुछ वर्षों में ही उसकी जिंदगी खाकपति से करोड़पति तक पहुंच गयी।

फर्जी APK बनाने में माहिर, युवाओं को देता था ट्रेनिंग

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मनीष फर्जी APK फाइल तैयार करने में एक्सपर्ट बताया जाता है। पहले उसने खुद इस तरीके को सीखा और बाद में इलाके के दूसरे युवाओं को अपने साथ जोड़ना शुरू किया।

बताया जाता है कि उसके नेटवर्क में 60 से अधिक युवक जुड़े हुए हैं। ये युवक सारठ, पथरड्डा, पथरौल और मधुपुर थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं।

आरोप है कि मनीष इन युवाओं को फर्जी APK फाइल के साथ आम लोगों के मोबाइल नंबरों की लिस्ट उपलब्ध कराता था। इसके बाद उसके नेटवर्क में शामिल युवक इन नंबरों पर APK फाइल भेजते थे। फाइल खोलने के बाद मोबाइल फोन को हैक कर संवेदनशील जानकारी हासिल करने और ठगी करने का प्रयास किया जाता था।

इस पूरे नेटवर्क से होने वाली कमाई में मनीष को कमीशन के तौर पर हिस्सा मिलता था। इस तरह वह खुद भी कमाता रहा और अपने नेटवर्क को भी लगातार बढ़ाता गया।

बड़े शहरों के महंगे होटलों से ऑपरेट करता था नेटवर्क

सूत्रों के मुताबिक, मनीष अक्सर अपने गांव या आसपास के इलाके में दिखाई नहीं देता था। बताया जाता है कि वह अपने साथियों के साथ कोलकाता समेत दूसरे बड़े शहरों के महंगे होटलों में ठहरकर साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित करता था।

पुलिस की उस पर लंबे समय से नजर थी। हालांकि, अब तक वह पुलिस की कार्रवाई से बचता रहा। जांच में यह भी जानकारी सामने आई कि वह पहले इलाके के युवाओं पर पैसे खर्च करता और उन्हें कम समय में आसानी से पैसा कमाने का लालच देता था।

जब युवक उसके संपर्क में आ जाते, तो उन्हें साइबर ठगी के तरीके सिखाकर अपने नेटवर्क के लिए काम कराया जाता था।

गिरफ्तारी से खुल सकते हैं नेटवर्क के कई राज

मंगलवार को देवघर साइबर थाना की पुलिस ने साइबर ठगी के मामले में करीब आधा दर्जन आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इनमें मनीष कुमार का नाम भी शामिल है।

पुलिस को उम्मीद है कि मनीष की गिरफ्तारी के बाद उसके नेटवर्क से जुड़े दूसरे युवाओं और साइबर ठगी के पूरे तंत्र के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। पुलिस अब उसके संपर्क में रहे अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।

अनजान APK और लिंक से रहें सावधान

साइबर थाना की पुलिस लगातार लोगों से मोबाइल फोन इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की अपील कर रही है। किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, OTP या अन्य संवेदनशील डिटेल साझा नहीं करनी चाहिए।

अगर मोबाइल पर कोई अनजान लिंक या APK फाइल आती है, तो उसे डाउनलोड या ओपन करने से बचें। साइबर ठग ऐसी फाइलों के जरिए मोबाइल और उसमें मौजूद जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

मोबाइल की संवेदनशील जानकारी हासिल होने के बाद ठग बैंक खाते से जुड़ी डिटेल का दुरुपयोग कर आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध लिंक, APK या मैसेज पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी तरह जांच करना जरूरी है।

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