राढ़ू नदी का पुल धंसा, प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर बंद किया रास्ता; दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित

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लगातार बारिश से पुल के बीच हिस्से में आई दरारें, पिलरों में भी नुकसान; बढ़ते जलस्तर के बीच हादसे का खतरा

रांची: लगातार बारिश के बीच राढ़ू नदी पर बने एक पुल की हालत बिगड़ने के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। पतराहातू से तेतला बड़ाइक टांड़ जाने वाले मार्ग पर स्थित क्षतिग्रस्त पुल से बुधवार को आवागमन पूरी तरह बंद करा दिया गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पुल के दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर दी है। साथ ही लोगों को पुल पर आने-जाने से रोकने के लिए नोटिस भी लगाया गया है।

बीच से धंसा पुल, पिलरों में आई दरारें

प्रशासन के मुताबिक पिछले दो दिनों से इलाके में लगातार हो रही बारिश का असर राढ़ू नदी के पुल पर पड़ा है। पुल का मध्य हिस्सा धंस गया है, जबकि इसके पिलरों में भी दरारें दिखाई दे रही हैं। पुल और नदी के पानी की सतह के बीच अब महज पांच से सात फीट की दूरी रह गई है। ऐसे में अगर बारिश का सिलसिला जारी रहा और नदी का जलस्तर और बढ़ा, तो पुल को और नुकसान पहुंचने की आशंका है।

बढ़ते जलस्तर से बढ़ा खतरा

लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। प्रशासन को आशंका है कि पानी का दबाव बढ़ने पर पुल की स्थिति और खराब हो सकती है। गंभीर स्थिति में पुल के बह जाने का खतरा भी बना हुआ है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को पुल से गुजरने से पूरी तरह रोक दिया है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो।

सिल्ली और सोनाहातू के कई गांव प्रभावित

पुल के बंद होने से सिल्ली और सोनाहातू प्रखंड के दर्जनों गांवों का सीधा संपर्क प्रभावित हुआ है। इस मार्ग का इस्तेमाल स्थानीय ग्रामीण रोजमर्रा के आवागमन के लिए करते हैं। रास्ता बंद होने के बाद ग्रामीणों को अब वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उन्हें पहले के मुकाबले अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है और आने-जाने में अतिरिक्त समय भी लग रहा है।

प्रशासन ने लोगों से की अपील

प्रशासन की ओर से लोगों को क्षतिग्रस्त पुल से दूर रहने और बैरिकेडिंग पार नहीं करने की अपील की गई है। ग्रामीणों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। फिलहाल पुल की सुरक्षा स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। लगातार बारिश और नदी के जलस्तर को देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में पुल की मरम्मत या स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर आगे प्रशासनिक कदम उठाए जाने की जरूरत है।

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