रिलायंस-रोल्स रॉयस की बड़ी साझेदारी, भारत में विकसित होगा AMCA फाइटर जेट इंजन

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रिलायंस और रोल्स-रॉयस भारत में एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स बनाने की संभावनाएं तलाशेंगी, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मिलेगा बड़ा boost

नई दिल्ली: भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटेन की प्रमुख एयरो-इंजन कंपनी रोल्स-रॉयस ने भारत में स्वदेशी कॉम्बैट एयरक्राफ्ट इंजन विकसित करने के लिए साझेदारी की घोषणा की है।

दोनों कंपनियों के बीच प्रस्तावित सहयोग के तहत AMCA के लिए इंजन के डिजाइन, विकास, निर्माण, परीक्षण और डिलीवरी से जुड़ी क्षमताएं भारत में विकसित करने की योजना है। इस पहल का मकसद देश में लड़ाकू विमान इंजन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर क्षमता तैयार करना है।

भारत में बनेगा एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स

रिलायंस ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए इस साझेदारी की जानकारी दी है। दोनों कंपनियों ने भारत में एक समर्पित एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने की बात कही है।

प्रस्तावित परिसर को एयरोस्पेस और प्रणोदन तकनीक के लिए एक प्रमुख केंद्र के तौर पर विकसित करने की योजना है। यहां लड़ाकू विमानों के इंजन से जुड़ी डिजाइनिंग, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग और उत्पादन जैसी क्षमताओं को विकसित किया जा सकता है।

रोल्स-रॉयस की तकनीक, रिलायंस की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता

इस प्रस्तावित साझेदारी में रोल्स-रॉयस अपनी एयरो-इंजन तकनीक और इंजीनियरिंग विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगी, जबकि रिलायंस अपनी तकनीकी, मैन्युफैक्चरिंग और बड़े स्तर पर प्रोजेक्ट को लागू करने की क्षमता का इस्तेमाल करेगी। दोनों कंपनियों का लक्ष्य भारत में ही ऐसा औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है, जो भविष्य में लड़ाकू विमान इंजनों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो।

आत्मनिर्भर भारत के लिए अहम कदम

भारत लंबे समय से अपने लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी इंजन विकसित करने की कोशिश कर रहा है। AMCA कार्यक्रम को इसी दिशा में देश की सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजनाओं में से एक माना जाता है। ऐसे में रिलायंस और रोल्स-रॉयस का प्रस्तावित सहयोग देश की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल और रक्षा उत्पादन में स्वदेशी क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में देश की अपनी क्षमता होना जरूरी है। उनके मुताबिक प्रस्तावित साझेदारी से भारत में एयरो-इंजन का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में मदद मिलेगी।

रोल्स-रॉयस ने भी बताया अहम माइलस्टोन

रोल्स-रॉयस के सीईओ तुफान एरगिनबिलगिक ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की उन्नत इंजीनियरिंग और इंजन तकनीक की विशेषज्ञता को रिलायंस की भारतीय औद्योगिक क्षमता के साथ जोड़ती है। उन्होंने इसे भारत में मजबूत और आत्मनिर्भर एयरोस्पेस इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

सिर्फ AMCA तक सीमित नहीं रहेगा सहयोग

दोनों कंपनियों के मुताबिक प्रस्तावित सहयोग का दायरा सिर्फ AMCA इंजन तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। भविष्य में रक्षा क्षेत्र के अन्य प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ सिविल एयरोस्पेस और नई पावर एवं प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी सहयोग के रास्ते खुल सकते हैं। इससे भारत में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग और इंजन तकनीक से जुड़ी घरेलू क्षमताओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

अभी समझौते का शुरुआती चरण

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दोनों कंपनियों की ओर से की गई घोषणा फिलहाल रणनीतिक साझेदारी के इरादे से जुड़ी है। इसे अभी हस्ताक्षरित संयुक्त उद्यम या अंतिम कॉन्ट्रैक्ट नहीं माना जा सकता।

दोनों कंपनियां प्रस्तावित गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स और इससे जुड़ी परियोजनाओं की संभावनाओं का आकलन करेंगी। अगर योजना आगे बढ़ती है, तो यह भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन कार्यक्रम के लिए एक बड़ा औद्योगिक कदम साबित हो सकता है।

कुल मिलाकर, रिलायंस और रोल्स-रॉयस का यह प्रस्तावित गठजोड़ भारत की रक्षा जरूरतों के लिए स्वदेशी इंजन क्षमता विकसित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि प्रस्तावित साझेदारी किस तरह आगे बढ़ती है और AMCA के स्वदेशी इंजन कार्यक्रम को इसका कितना लाभ मिलता है।

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