सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नई समय-सीमा लागू। कोर्ट या सरकार के आदेश पर आपत्तिजनक कंटेंट हटाने में देरी पर होगी कार्रवाई।

नई दिल्ली: सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक तथा संवेदनशील सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने नियम और सख्त कर दिए हैं। अब सरकार या अदालत के आदेश मिलने के बाद संबंधित ऑनलाइन सामग्री को दो घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में संशोधन के बाद यह नई व्यवस्था लागू की है। इसका उद्देश्य डीपफेक, एआई से तैयार भ्रामक सामग्री, फर्जी सूचनाओं और अन्य हानिकारक कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
नई व्यवस्था के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को पहले की तुलना में काफी कम समय में कार्रवाई करनी होगी। यदि किसी सामग्री को कानून के अनुसार हटाने का निर्देश मिलता है, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर उसका पालन करना अनिवार्य होगा।सरकार का मानना है कि इससे डिजिटल प्लेटफॉर्म अधिक जवाबदेह बनेंगे और ऑनलाइन माध्यमों पर फैलने वाली भ्रामक तथा आपत्तिजनक सामग्री पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। हाल के दिनों में डीपफेक और एआई आधारित फर्जी वीडियो के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नई समय-सीमा लागू होने से सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी मॉडरेशन व्यवस्था और निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करना होगा, ताकि संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

