मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद की बैठक; 79 कैदियों के मामलों की हुई समीक्षा, स्वतंत्रता दिवस तक रिहा हो सकते हैं 26 कैदी

रांची: झारखंड में विभिन्न जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 26 सजायाफ्ता कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में हुई झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में राज्य की अलग-अलग जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 79 कैदियों की रिहाई से संबंधित मामलों की समीक्षा की गई। विचार-विमर्श के बाद इनमें से 26 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी। इन कैदियों को 15 अगस्त तक रिहा किया जा सकता है।
सभी प्रमंडलों में ओपन जेल खोलने की तैयारी
बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के सभी प्रमंडलों में ओपन जेल खोलने की दिशा में पहल करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से इसके लिए चिह्नित स्थानों का प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है। इस पहल का उद्देश्य जेल से बाहर आने वाले कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके पुनर्वास की व्यवस्था को मजबूत करना है।
पिछली बैठक के 42 मामलों पर भी हुई चर्चा

राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद की बैठक में 37 नए मामलों के साथ पिछली बैठक से जुड़े 42 मामलों पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ पात्रता की शर्तों, कैदियों के आचरण, कारावास की अवधि, कानूनी प्रावधान और संबंधित न्यायालयों की टिप्पणियों जैसे विभिन्न पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की।
इसके अलावा जेल अधीक्षकों और प्रोबेशन पदाधिकारियों की रिपोर्ट सहित संबंधित मामलों के सभी पहलुओं पर विचार किया गया। इसके बाद 26 सजायाफ्ता कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी।
न्याय के साथ मानवीय संवेदनाओं पर जोर
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के साथ मानवीय संवेदनाओं और सुधारात्मक दृष्टिकोण को भी समान महत्व दे रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जेल से रिहा होने वाले कैदियों के पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापन और सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
रिहाई के बाद नई शुरुआत का मिले अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि रिहा होने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास होना चाहिए, ताकि उन्हें जीवन में नई शुरुआत करने का अवसर मिल सके और सामाजिक समरसता भी मजबूत हो। इसके लिए ऐसे कैदियों को आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार जैसी सुविधाओं तथा विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
बैठक में उन कैदियों का डेटाबेस तैयार करने का भी निर्देश दिया गया, जो वर्तमान में जेल में हैं या अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। इससे उनके पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिल सकेगी।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, डीजीपी तदाशा मिश्रा, प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी, विधि (न्याय) विभाग, कारा महानिरीक्षक सहित कारा एवं सुधारात्मक सेवाओं से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे।

