Commonwealth Games 2026: दिलीप महादु गावित ने 100 मीटर T47 में जीता गोल्ड, गुरु को समर्पित किया ऐतिहासिक मेडल

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10.71 सेकंड में रेस पूरी कर बनाया गेम्स रिकॉर्ड, गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष पैरा एथलीट बने; मोहम्मद बासिल ने सिल्वर पर जमाया कब्जा

नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीट्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को गोल्ड और सिल्वर मेडल दिलाया। खेलों के सातवें दिन पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में भारत के दिलीप महादु गावित ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि भारत के ही मोहम्मद बासिल ने रजत पदक जीता।

दिलीप महादु गावित ने 10.71 सेकंड में 100 मीटर की रेस पूरी कर गोल्ड मेडल हासिल किया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने गेम्स रिकॉर्ड बनाया और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी दर्ज किया। वहीं मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड का समय लेते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

गुरु पूर्णिमा पर कोच को समर्पित किया गोल्ड

गोल्ड मेडल जीतने के बाद दिलीप भावुक नजर आए। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच को देते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यह मेडल उनके गुरु के लिए एक खास तोहफा है। दिलीप ने अपने बचपन के संघर्ष को याद करते हुए बताया कि बचपन में वह एक पेड़ से गिर गए थे। हादसे के कारण उनके एक हाथ का हिस्सा काटना पड़ा। इसके बाद जिंदगी की राह आसान नहीं रही, लेकिन इसी दौरान उनके कोच ने उनकी दौड़ने की क्षमता को पहचाना।

दिलीप के मुताबिक परिवार की आर्थिक परिस्थितियां कठिन थीं। उनके कोच ने न केवल उन्हें खेल के लिए प्रोत्साहित किया, बल्कि उनकी जिम्मेदारी भी संभाली। दिलीप ने बताया कि कोच ने उन्हें अपने परिवार का हिस्सा बना लिया और आज उनकी ट्रेनिंग से लेकर दूसरी जरूरतों तक में साथ देते हैं।

नासिक में करते हैं ट्रेनिंग

दिलीप ने बताया कि वह नासिक में प्रशिक्षण लेते हैं। गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने कहा कि फाइनल में दौड़कर उन्हें बेहद खुशी हुई और यह उपलब्धि उनके वर्षों के संघर्ष और प्रशिक्षण का परिणाम है। उनके लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि जिस गुरु ने मुश्किल दौर में उनका हाथ थामा, उसी गुरु को वह अपने करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक समर्पित कर पाए।

पीएम मोदी और सरकार को दिया धन्यवाद

दिलीप ने पैरा खिलाड़ियों को मिलने वाले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), पैरा खेल से जुड़े संस्थानों और सरकार का भी आभार जताया।

उन्होंने कहा कि पैरा एथलीट्स को मिल रहे सहयोग और सुविधाओं के कारण खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन कर पा रहे हैं।

बचपन में लोग उड़ाते थे मजाक

अपनी जिंदगी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए दिलीप ने बताया कि दिव्यांगता के कारण बचपन में कई लोग उनका मजाक उड़ाते थे और तरह-तरह की बातें करते थे। हालांकि उन्होंने इन बातों को अपने लक्ष्य के रास्ते में नहीं आने दिया। इसके बाद कोच उनके जीवन का अहम हिस्सा बने। दिलीप के मुताबिक वह अपने कोच के घर पर ही रहते हैं और कोच ने उन्हें अपने बच्चे की तरह संभाला है।

अब एशियन गेम्स और ओलंपिक गोल्ड पर नजर

कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक सफलता के बावजूद दिलीप का सफर यहीं खत्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि आने वाले एशियन गेम्स में भी वह शानदार प्रदर्शन करने की पूरी कोशिश करेंगे। दिलीप फिलहाल अपना पूरा ध्यान खेल पर लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके कोच का लक्ष्य है कि पहले वह देश के लिए ओलंपिक/पैरालंपिक स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल करें। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर उनकी तैयारी आगे बढ़ रही है।

इतिहास रच गए दिलीप महादु गावित

इस जीत के साथ दिलीप महादु गावित ने भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में एक खास उपलब्धि अपने नाम की। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष पैरा एथलीट बन गए।

100 मीटर T47 में दिलीप का गोल्ड और मोहम्मद बासिल का सिल्वर भारत के लिए दोहरी उपलब्धि साबित हुई। एक तरफ भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम पर शीर्ष दो स्थान हासिल किए, वहीं दिलीप की कहानी संघर्ष, गुरु के सहयोग और खेल के जरिए जिंदगी बदलने की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई।

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