Trial of Plastic Notes देश में जल्द ही ₹10 और ₹20 के पॉलिमर (Plastic) नोटों का ट्रायल शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इन नोटों के परीक्षण के लिए मंजूरी दे दी है। यदि यह trial of plastic notes सफल रहता है, तो भविष्य में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इन्हें नियमित रूप से जारी कर सकता है।
Trial of Plastic Notes: लोकसभा में सरकार ने दी जानकारी
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार ने पॉलिमर नोटों के trial of plastic notes के लिए ₹10 और ₹20 मूल्य वर्ग के 100-100 करोड़ नोट, यानी कुल 200 करोड़ नोट छापने की मंजूरी दी है । यह trial of plastic notes भारत में पहली बार इतने बड़े स्तर पर होने जा रहा है। इससे पहले 2015 में रिजर्व बैंक ने ₹10 के प्लास्टिक नोटों का परीक्षण किया था, लेकिन उस समय उन्हें नियमित रूप से जारी नहीं किया गया था।
Trial of Plastic Notes: ट्रायल के बाद होगा अंतिम फैसला
सरकार के अनुसार, पहले इन नोटों का trial of plastic notes किया जाएगा। यदि यह trial of plastic notes सफल रहता है और अपेक्षित परिणाम मिलते हैं, तो RBI इन्हें चरणबद्ध तरीके से नियमित प्रचलन में ला सकता है । प्लास्टिक के नोटों के प्रयोग को लेकर RBI का कहना है कि जब तक सफल परीक्षण नहीं हो जाता, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी । यह trial of plastic notes कम से कम एक साल तक चलेगा, जिसमें नोटों की टिकाऊपन, सुरक्षा विशेषताओं और स्वच्छता का मूल्यांकन किया जाएगा ।
Trial of Plastic Notes: पुराने नोट रहेंगे वैध
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस trial of plastic notes के दौरान फिलहाल चलन में मौजूद कागज के ₹10 और ₹20 के नोट पहले की तरह पूरी तरह वैध रहेंगे । पॉलिमर नोट आने के बाद भी पुराने नोटों को तत्काल बंद नहीं किया जाएगा। दोनों प्रकार के नोट समानांतर रूप से चलन में रहेंगे।
Trial of Plastic Notes: क्या हैं पॉलिमर नोटों की खासियत?
पॉलिमर नोट सामान्य कागज के नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माने जाते हैं । इस trial of plastic notes के दौरान इनकी प्रमुख विशेषताओं का परीक्षण किया जाएगा:
- जल्दी फटते नहीं हैं
- पानी से कम खराब होते हैं
- गंदगी और नमी का असर कम पड़ता है
- लंबे समय तक उपयोग में बने रहते हैं
- रखरखाव और बार-बार छपाई की आवश्यकता कम हो सकती है
Trial of Plastic Notes: क्यों लाए जा रहे हैं नए नोट?
सरकार का उद्देश्य अधिक टिकाऊ मुद्रा उपलब्ध कराना और नोटों की गुणवत्ता में सुधार करना है । पॉलिमर नोट कई देशों में पहले से उपयोग किए जा रहे हैं और उनकी लंबी आयु के कारण उन्हें अधिक प्रभावी माना जाता है । इन नोटों की आयु लगभग 2.5 गुना अधिक होती है, जिससे सरकार की नोट छपाई की लागत कम हो सकती है ।
Trial of Plastic Notes: देशों का अनुभव
कई देशों ने प्लास्टिक नोटों को सफलतापूर्वक अपनाया है। ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में पहली बार प्लास्टिक नोट पेश किए थे और अब उनके सभी नोट पॉलिमर के हैं । कनाडा, यूके, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे देशों ने भी पॉलिमर नोटों को अपनाया है और उनसे सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं । भारत में पहले भी RBI ने ₹10 के प्लास्टिक नोटों का परीक्षण किया था, लेकिन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नहीं किया गया था ।
Trial of Plastic Notes: क्या होगा आगे?
अब सभी की नजर इस trial of plastic notes पर रहेगी। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो आने वाले समय में भारतीय बाजार में ₹10 और ₹20 के नए पॉलिमर नोट देखने को मिल सकते हैं, जबकि मौजूदा कागजी नोट भी समानांतर रूप से वैध रहेंगे । इस ट्रायल में नोटों के अलग-अलग डिजाइन और सुरक्षा सुविधाओं का भी परीक्षण किया जाएगा।
बाहरी संसाधन
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): https://www.rbi.org.in
- वित्त मंत्रालय, भारत सरकार: https://finmin.nic.in
- करेंसी नोटों की जानकारी: https://www.rbi.org.in/currency
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