CM School of Excellence: झारखंड में 472 सीटें खाली, विभाग ने बढ़ाए नामांकन के प्रयास

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CM School of Excellence झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस योजना में नामांकन को लेकर चुनौती बनी हुई है। कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए इन विद्यालयों में अब भी बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पलामू, एसएसएलएनटी (धनबाद) और कोडरमा के मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में कुल 472 सीटें रिक्त हैं । इससे पहले 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में कुल 16,362 सीटें खाली पाई गई थीं 

CM School of Excellence में खाली सीटों का ब्योरा

जानकारी के मुताबिक, पलामू जिला मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में 196, एसएसएलएनटी स्कूल (धनबाद) में 183 और कोडरमा जिला स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में 93 सीटें अभी तक नहीं भर सकी हैं। कोडरमा जिले की बात करें तो तीनों स्कूलों में कुल 3,125 सीटें स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल 1,654 विद्यार्थियों का ही नामांकन हो पाया है। यानी 1,471 सीटें अभी भी खाली हैं । कोडरमा के झुमरी तिलैया गर्ल्स सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में सबसे अधिक 830 सीटें खाली हैं, जबकि चंद्रावती मेमोरियल सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, डोमचांच में 568 और केजीबीवी सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, जयनगर में केवल 73 सीटें खाली हैं 

CM School of Excellence में कम नामांकन के क्या कारण?

शिक्षा विभाग का मानना है कि कम नामांकन के पीछे कई कारण हैं। इनमें विद्यालयों का पर्याप्त प्रचार-प्रसार न होना, ग्रामीण क्षेत्रों तक सही जानकारी का नहीं पहुंचना, निजी स्कूलों की प्रतिस्पर्धा और निर्धारित अंक मानदंड प्रमुख हैं। पहले मॉडल स्कूलों को ब्लॉक-स्तर पर पहुंच के लिए बनाया गया था, लेकिन दुर्गम स्थानों पर स्थित होने के कारण छात्रों को आने-जाने में परेशानी होती थी, जिससे नामांकन दर घट गई । कई छात्र न्यूनतम अंकों की शर्त पूरी नहीं कर पाने के कारण भी प्रवेश से वंचित रह गए। इसके अलावा, अभिभावकों और विद्यार्थियों तक स्कूलों की सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक लैब, स्मार्ट क्लास और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की जानकारी पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाई है 

CM School of Excellence: शिक्षा विभाग की नई पहल

विभाग अब शेष सीटों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है। अभिभावकों और विद्यार्थियों तक स्कूलों की सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक लैब, स्मार्ट क्लास और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। राज्य परियोजना निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को विद्यालयवार समीक्षा कर इस सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है । इसके अलावा, सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में नामांकन बढ़ाने के लिए विद्यालय स्तर पर अभिभावकों और बच्चों से संपर्क किया जा रहा है । मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अधिकारियों को इन स्कूलों की संख्या 5,000 तक बढ़ाने की योजना पर तेजी से काम करने का निर्देश दिया है । इन स्कूलों का उद्देश्य गरीब बच्चों को निजी स्कूलों के स्तर की शिक्षा प्रदान करना है 

CM School of Excellence में शिक्षा की गुणवत्ता

इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं जैसे साइंस लैब, लाइब्रेरी और डिजिटल लर्निंग टूल्स उपलब्ध हैं, जो किसी भी निजी स्कूल के बराबर हैं । शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने कहा कि सरकार गरीब बच्चों को सीबीएसई मान्यता प्राप्त अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा देने का अवसर प्रदान करना चाहती है । इससे गरीब बच्चों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर अवसर मिल सकेंगे, क्योंकि अधिकांश परीक्षाओं के प्रश्न सीबीएसई बोर्ड के आधार पर तैयार किए जाते हैं 

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