सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेजियम जोन (Taj Trapezium Zone) में नए उद्योगों की स्थापना पर लगी करीब दो वर्ष पुरानी रोक हटा दी है। अदालत के इस फैसले से उत्तर प्रदेश और राजस्थान के उन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से प्रतिबंध के कारण प्रभावित थे। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अक्टूबर 2024 के अपने उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें टीटीजेड प्राधिकरण को अदालत की पूर्व अनुमति के बिना नई औद्योगिक इकाइयों को मंजूरी देने से रोक दिया गया था।
ताज ट्रेपेजियम जोन लगभग 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें उत्तर प्रदेश के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और एटा तथा राजस्थान का भरतपुर जिला शामिल है। इस क्षेत्र को ताजमहल और अन्य ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट 1984 से ही एमसी मेहता की जनहित याचिका के माध्यम से इस क्षेत्र में पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों की निगरानी कर रहा है।
410 लंबित आवेदनों पर आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
अदालत ने करीब 410 लंबित आवेदनों के निस्तारण का रास्ता भी साफ कर दिया है। इन आवेदनों में ज्यादातर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) द्वारा स्थापना, विस्तार या स्थानांतरण की अनुमति मांगी गई है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इन आवेदनों पर विचार करने में देरी नहीं होनी चाहिए, भले ही क्षेत्र के लिए विजन डॉक्यूमेंट, संचयी प्रभाव आकलन अध्ययन और गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की परिभाषा पर नीरी की अंतिम रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण अध्ययन अभी भी लंबित हैं।
पर्यावरणीय शर्तों के साथ मिलेगी मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उद्योगों की स्थापना बिना निगरानी के नहीं होगी। प्रत्येक प्रस्तावित परियोजना की जांच पर्यावरण विशेषज्ञों की समिति करेगी। अदालत ने निर्देश दिया कि केंद्रीय अधिकारिता समिति (CEC) और राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) के विशेषज्ञों की भागीदारी से हर आवेदन की जांच की जाएगी।
अदालत ने कहा, हम इसलिए निर्देश देते हैं कि टीटीजेड प्राधिकरण लंबित आवेदनों पर कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, ऐसे आवेदनों पर विचार करने के लिए बुलाई गई हर बैठक में सीईसी द्वारा नामित एक सदस्य और नीरी के एक विशेषज्ञ प्रतिनिधि को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। जब तक दोनों विशेषज्ञ मौजूद न हों, तब तक कोई बैठक नहीं होगी।
वीटो पावर मिलेगी विशेषज्ञों को
अदालत ने विशेषज्ञों को वीटो पावर भी दी है। यदि दोनों में से कोई भी विशेषज्ञ किसी उद्योग को गैर-प्रदूषणकारी नहीं मानता है, तो उस आवेदन को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि कुछ व्यावहारिक समाधान की आवश्यकता है और ऐसा प्रतीत होता है कि केवल गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को ही टीटीजेड में अनुमति दी जानी चाहिए।
अदालत ने आगे कहा कि जहां दोनों विशेषज्ञ और टीटीजेड प्राधिकरण सहमत हों, वहां आवेदनों को कानून के अनुसार निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सकता है, बिना अदालत का रुख किए। लेकिन सभी निर्णयों को सीईसी की वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए, ताकि जनता को आपत्ति या सुझाव देने का अवसर मिले।
रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि टीटीजेड में 400 आवेदन लंबित हैं और नए उद्योगों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगने से लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि टीटीजेड 10,400 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है जिसमें छह जिले आते हैं और लाखों लोगों की आकांक्षाओं को कैसे रोका जा सकता है।
ताजमहल की सुरक्षा रहेगी सर्वोच्च प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दोहराया कि ताजमहल और क्षेत्र की पर्यावरणीय विरासत की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उद्योगों की स्थापना केवल सख्त पर्यावरणीय शर्तों और विशेषज्ञों की स्वीकृति के बाद ही संभव होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी भारी उद्योग पर विचार नहीं किया जा रहा है, केवल गैर-प्रदूषणकारी MSME उद्योगों को ही अनुमति दी जाएगी।
इस फैसले को औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बाहरी संसाधन
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट: https://main.sci.gov.in
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