Sonmer Mata Temple: आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम
झारखंड के खूंटी जिले में स्थित Sonmer Mata Temple आस्था, संस्कृति और प्रकृति का एक अनोखा संगम है। यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी अनोखी पूजा पद्धति के लिए भी जाना जाता है। Sonmer Mata Temple झारखंड का इकलौता मंदिर है जहां संस्कृत की जगह आदिवासी भाषा मुंडारी में मंत्रोच्चार होता है ।
51 फीट ऊंचाई पर स्थित Sonmer Mata Temple खूंटी जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर और राजधानी रांची से लगभग 45 किलोमीटर दूर है । इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां कोई पंडित पूजा नहीं कराता, बल्कि गांव के पाहन (आदिवासी पुजारी) ही यह काम करते हैं ।
मुंडारी भाषा में होती है Sonmer Mata Temple की पूजा
Sonmer Mata Temple की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां देवी दुर्गा की पूजा मुंडारी भाषा में की जाती है । मंदिर के पाहन कहते हैं कि अपने गांव-घर की भाषा में देवी की आराधना करने से निकटता का भाव आता है ।
यह परंपरा Sonmer Mata Temple को अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। यहां मातृभाषा में मंत्रोच्चार के साथ देवी को भैंसा, बकरा और मुर्गा की बलि दी जाती है ।
कैसे पहुंचें Sonmer Mata Temple?
Sonmer Mata Temple पहुंचने के कई रास्ते हैं:
| शहर | दूरी |
|---|---|
| रांची | 45 किलोमीटर (लोधमा-भाया-कर्रा होते हुए) |
| खूंटी | 10 किलोमीटर |
| बेड़ो | 32 किलोमीटर |
| सिसई | 60 किलोमीटर |
Sonmer Mata Temple तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क बनी हुई है । मंदिर जंगल के किनारे स्थित है, जहां से लगातार ठंडी हवा बहती है ।
Sonmer Mata Temple में मन्नत पूरी करने की अनोखी परंपरा
Sonmer Mata Temple की एक प्रमुख मान्यता यह है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत यहां पूरी होती है । श्रद्धालु यहां मन्नत मांगने के लिए लाल मुर्गा चढ़ाते हैं और मन्नत पूरी होने पर काले बकरे की बलि देते हैं ।
Sonmer Mata Temple में एक और खास परंपरा है – दुर्गा पूजा के दौरान नहीं, बल्कि आश्विन पूर्णिमा के दिन भैंसे की बलि दी जाती है । यह परंपरा राजतंत्र के समय से चली आ रही है ।
300 साल पुराना है Sonmer Mata Temple का इतिहास
Sonmer Mata Temple का इतिहास लगभग 300 साल पुराना है । मान्यता है कि मां दुर्गा ने सबसे पहले गुड़गुड़ गाढ़ा में प्रकट हुई थीं। बाद में गांव के दिवंगत चतुर शिखर को सपने में देवी मां आईं, जिसके बाद 1917 में उन्होंने माता को बैलगाड़ी से सोनमेर टोंगरी ले जाकर स्थापित किया ।
Sonmer Mata Temple का वर्तमान भव्य मंदिर 1980-81 में बना, जिसमें ओडिशा के कारीगरों ने 51 फीट ऊंचा गुंबज तैयार किया । मंदिर में दस भुजाधारी मां दुर्गा की प्रतिमा विराजमान है ।
Sonmer Mata Temple की प्रमुख मान्यताएं
- मंगलवार का विशेष महत्व: मंगलवार को Sonmer Mata Temple में भक्तों की विशेष भीड़ होती है ।
- लापता व्यक्तियों की वापसी: मान्यता है कि अगर कोई लापता है और दुर्गा मां से प्रार्थना की जाए तो वह वापस घर लौट आता है ।
- चोरी की वस्तु की प्राप्ति: किसी की गाड़ी या वस्तु चोरी हो जाने पर माता से प्रार्थना करने से उसकी प्राप्ति होती है ।
- स्वप्न में दर्शन: मान्यता है कि पूर्वजों को मां दुर्गा ने सपने में कहा था कि “मैं तेरे गांव की टोंगरी में बसी हूं” ।
Sonmer Mata Temple न केवल झारखंड बल्कि ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है । यह मंदिर आदिवासियों और गैर-आदिवासियों दोनों की आस्था का केंद्र है


