थलपति विजय की अलग सियासत! BJP का विरोध भी, मोदी सरकार से संवाद भी, विपक्ष से क्यों अलग है TVK की रणनीति?

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय अन्य विपक्षी दलों से हटकर पॉलिटिक्स खेल रहे हैं। वह बीजेपी का विरोध कर रहे हैं, लेकिन पीएम मोदी और केंद्र सरकार के साथ तालमेल भी बनाकर रख रहे हैं। उनकी राजनीति में न ज्यादा दोस्ती है, न ज्यादा बैर। वह एकदम नफा-नुकसान की राजनीति खेलते नजर आ रहे हैं।

नई दिल्ली: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख थलपति विजय इन दिनों अपनी अलग राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चा में हैं। जहां देश के कई विपक्षी दल केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं विजय ने राजनीति का अलग रास्ता चुना है। वे वैचारिक और नीतिगत मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का विरोध कर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के साथ प्रशासनिक स्तर पर संवाद और समन्वय बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहे हैं।

BJP की नीतियों पर हमला, लेकिन पीएम मोदी पर नहीं

राजनीति में प्रवेश के बाद थलपति विजय ने 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी पर कई मुद्दों को लेकर हमला बोला। उन्होंने सत्ता के केंद्रीकरण, हिंदी थोपने, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार की आलोचना की। हालांकि, उन्होंने अपने भाषणों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमला करने से परहेज किया और अपना विरोध नीतिगत मुद्दों तक सीमित रखा।

विरोध और सहयोग का संतुलन

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, थलपति विजय “जहां जरूरी हो विरोध, जहां राज्य का हित हो वहां सहयोग” की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उन्होंने वैचारिक मतभेदों को प्रशासनिक संबंधों से अलग रखने की कोशिश की है। यही वजह है कि केंद्र सरकार के साथ संवाद जारी रखते हुए राज्य के विकास और निवेश से जुड़े मामलों में सहयोग का रास्ता भी खुला रखा गया है।

अन्य विपक्षी दलों से अलग रणनीति

पिछले एक दशक में कई विपक्ष-शासित राज्यों और केंद्र सरकार के बीच लगातार टकराव देखने को मिला है। तमिलनाडु में डीएमके सरकार ने कई बार केंद्र पर राज्य के अधिकारों की अनदेखी और फंड रोकने के आरोप लगाए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी केंद्र पर आर्थिक भेदभाव का आरोप लगाया और कई केंद्रीय बैठकों से दूरी बनाई। वहीं दिल्ली में अरविंद केजरीवाल भी केंद्र सरकार के साथ प्रशासनिक विवादों को लेकर लगातार मुखर रहे।

इसके विपरीत, थलपति विजय ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद केंद्र सरकार से संवाद बनाए रखने का रास्ता चुना है। यही कारण है कि उनकी राजनीतिक शैली को विपक्ष के पारंपरिक रवैये से अलग माना जा रहा है।

नीतियों पर कायम है सरकार का रुख

हालांकि, थलपति विजय की सरकार ने अपने वैचारिक रुख में कोई बदलाव नहीं किया है। सरकार अब भी तीन-भाषा नीति का विरोध करती है, नई शिक्षा नीति से जुड़े फंडिंग मॉडल पर सवाल उठाती है और संघवाद व राज्य स्वायत्तता के मुद्दों पर तमिलनाडु के पारंपरिक रुख को मजबूती से आगे बढ़ा रही है।

नई दिल्ली से संवाद बढ़ाने पर जोर

राजनीतिक टकराव को प्राथमिकता देने के बजाय थलपति विजय ने केंद्र सरकार के साथ संवाद बढ़ाने का विकल्प चुना है। उनका मानना है कि राज्य के विकास, निवेश और प्रशासनिक हितों के लिए सहयोग और बातचीत जरूरी है। इसी वजह से उनकी सरकार वैचारिक विरोध के बावजूद केंद्र के साथ संवाद बनाए हुए है।

क्या विपक्ष की राजनीति का नया मॉडल है?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि थलपति विजय की रणनीति विपक्ष की राजनीति के लिए एक नया मॉडल बन सकती है। इसमें सरकार की नीतियों का विरोध किया जाता है, लेकिन विकास, निवेश और प्रशासनिक सहयोग जैसे मुद्दों पर केंद्र के साथ तालमेल भी रखा जाता है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य विपक्षी दलों के लिए भी चर्चा का विषय बन सकता है।

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