
अबुआ न्यूज़ झारखंड | हजारीबाग
झारखंड के हजारीबाग जिले का एक छोटा सा गांव आज अपनी खास पहचान के कारण पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह गांव अब “मैंगो विलेज” यानी आमों के गांव के नाम से जाना जाता है। यहां के आमों की मिठास और गुणवत्ता ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई है, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बदल दी है।
हजारीबाग के आरा गांव में बड़े पैमाने पर आम की खेती की जाती है। गांव के बागानों में दशहरी, लंगड़ा, मालदा, सुकुल और मिठू जैसी कई प्रसिद्ध किस्मों के आम उगाए जाते हैं। गर्मियों के मौसम में जब पेड़ों पर आम पकने लगते हैं, तो पूरा इलाका आम की खुशबू से महक उठता है।
आम की खेती बनी रोजगार का बड़ा साधन
एक समय था जब गांव के अधिकांश लोग पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। लेकिन धीरे-धीरे किसानों ने आम की बागवानी को अपनाया और आज यह उनके लिए आय का प्रमुख स्रोत बन चुका है। गांव के कई परिवार केवल आम की खेती से ही सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जैसे ही पेड़ों में मंजर आते हैं, व्यापारी बागानों का सौदा करने पहुंच जाते हैं। इससे किसानों को बाजार की अनिश्चितता का सामना कम करना पड़ता है और उन्हें पहले से ही अच्छी कीमत मिल जाती है।
बिहार और झारखंड तक है मांग
आरा गांव के आमों की मांग सिर्फ हजारीबाग या झारखंड तक सीमित नहीं है। बिहार के पटना, गया, नवादा और बिहार शरीफ जैसे शहरों तक यहां के आम भेजे जाते हैं। स्वाद और मिठास के कारण खरीदार सीधे गांव पहुंचकर आम खरीदना पसंद करते हैं।
व्यापारियों के अनुसार, यहां के आमों की गुणवत्ता उन्हें बाजार में अलग पहचान दिलाती है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में व्यापारी और खरीदार इस गांव का रुख करते हैं।
बदल रही गांव की तस्वीर
आम की खेती से बढ़ी आमदनी का असर गांव के विकास पर भी दिखाई दे रहा है। कई परिवारों ने अपने बच्चों की शिक्षा, बेहतर मकान और आधुनिक खेती के साधनों में निवेश किया है। गांव के युवाओं को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने लगा है, जिससे पलायन में कमी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक, कोल्ड स्टोरेज और बेहतर मार्केटिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यह गांव राष्ट्रीय स्तर पर आम उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उदाहरण
हजारीबाग का यह “मैंगो विलेज” इस बात का उदाहरण है कि यदि किसान सही फसल और बेहतर प्रबंधन अपनाएं तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है। आम की खेती ने यहां केवल फलों का उत्पादन नहीं बढ़ाया, बल्कि सैकड़ों परिवारों के जीवन में खुशहाली भी लाई है।


