
चांदनी झा | अबुआ न्यूज़ झारखंड
यूरोप में बन रही दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक Fehmarnbelt Tunnel ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। जर्मनी और डेनमार्क को सीधे जोड़ने वाली इस सुरंग के निर्माण में मई 2026 में एक विशाल सफलता मिली, जब लगभग 73,000 टन वजनी और 217 मीटर लंबे पहले टनल सेगमेंट को समुद्र के भीतर सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया।
यह परियोजना केवल यूरोप ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बाल्टिक सागर के नीचे बन रही यह सुरंग दुनिया की सबसे लंबी इमर्स्ड (Immersed) टनल मानी जा रही है। इसके पूरा होने के बाद जर्मनी और डेनमार्क के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी और दोनों देशों के बीच व्यापार तथा परिवहन को नई गति मिलेगी।
क्या है Fehmarnbelt Tunnel?
Fehmarnbelt Tunnel एक विशाल समुद्री सुरंग परियोजना है जो जर्मनी के फेहमार्न द्वीप और डेनमार्क के लोलैंड द्वीप को जोड़ेगी। इसकी कुल लंबाई लगभग 18 किलोमीटर होगी। वर्तमान में दोनों देशों के बीच समुद्री फेरी सेवाओं का उपयोग करना पड़ता है, जिसमें लगभग एक घंटा लगता है।
सुरंग के चालू होने के बाद यही दूरी महज 7 मिनट ट्रेन से और लगभग 10 मिनट सड़क मार्ग से तय की जा सकेगी। इससे न केवल लोगों की यात्रा आसान होगी बल्कि यूरोप के महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों को भी मजबूती मिलेगी।
समुद्र के नीचे कैसे बनाई जा रही है सुरंग?
यह परियोजना पारंपरिक तरीके से पहाड़ों को काटकर नहीं बनाई जा रही है। इसके लिए पहले विशाल कंक्रीट सेगमेंट तैयार किए जाते हैं। फिर उन्हें समुद्र में तैराकर निर्धारित स्थान तक लाया जाता है और बेहद सटीक तकनीक की मदद से समुद्र तल में स्थापित किया जाता है।
पहले सेगमेंट का वजन करीब 73,000 टन बताया गया है। इसे समुद्र के भीतर स्थापित करने के दौरान इंजीनियरों ने केवल 3 मिलीमीटर की सटीकता हासिल की। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संरचना को इतनी बारीकी से स्थापित करना आधुनिक इंजीनियरिंग की एक असाधारण उपलब्धि है।
यूरोप के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
Fehmarnbelt Tunnel को यूरोप के सबसे महत्वपूर्ण परिवहन गलियारों में से एक माना जा रहा है। इसके माध्यम से स्कैंडिनेवियाई देशों और मध्य यूरोप के बीच संपर्क और मजबूत होगा।
इस परियोजना से:
- यात्रा समय में भारी कमी आएगी।
- व्यापारिक परिवहन तेज होगा।
- फेरी सेवाओं पर निर्भरता कम होगी।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है।
- यूरोप की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुरंग भविष्य में यूरोपीय परिवहन नेटवर्क की रीढ़ साबित हो सकती है।
2029 तक पूरा करने का लक्ष्य
परियोजना पर कई वर्षों से काम चल रहा है और इसे 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य में अत्याधुनिक मशीनों, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
दुनिया भर के इंजीनियर इस परियोजना को एक केस स्टडी के रूप में देख रहे हैं। समुद्र के नीचे इतनी विशाल सुरंग का निर्माण न केवल तकनीकी चुनौती है, बल्कि यह मानव कौशल, विज्ञान और आधुनिक तकनीक की क्षमता का भी शानदार उदाहरण है।
Fehmarnbelt Tunnel का पहला विशाल सेगमेंट समुद्र के भीतर सफलतापूर्वक स्थापित होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यह सुरंग यूरोप के परिवहन इतिहास में एक नया अध्याय लिख सकती है।



