
Ranchi/अबुआ न्यूज़ झारखंड: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) अब डिजिटल दुनिया से निकलकर सड़क पर उतरने की तैयारी में है। 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। लाखों युवाओं के समर्थन का दावा करने वाला यह आंदोलन आखिर है क्या और इसके पीछे की नाराजगी किस बात को लेकर है?
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अभियान के रूप में हुई थी। इसके संस्थापक अभिजीत दिपके ने इसे युवाओं की आवाज बताते हुए शुरू किया था। शुरुआत में यह आंदोलन बेरोजगारी, महंगाई और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर मीम्स और व्यंग्य के माध्यम से अपनी बात रखता था, लेकिन देखते ही देखते यह एक बड़े डिजिटल आंदोलन में बदल गया। Reuters और AP की रिपोर्टों के अनुसार, इस आंदोलन ने लाखों युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया है, खासकर उन युवाओं को जो रोजगार, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
“कॉकरोच” नाम भी अपने आप में एक प्रतीक बन गया है। आंदोलन से जुड़े लोग कहते हैं कि कॉकरोच वह जीव है जो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह जाता है। आंदोलन के समर्थक खुद को ऐसे युवाओं के रूप में पेश कर रहे हैं जिन्हें व्यवस्था नजरअंदाज करती है, लेकिन जो लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यह नाम उस विवाद के बाद चर्चा में आया था जब बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई एक टिप्पणी पर सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।
हाल के दिनों में NEET, CBSE, CUET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने इस आंदोलन को नई ऊर्जा दी है। कॉकरोच जनता पार्टी का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार गड़बड़ियां हो रही हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर संगठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने घोषणा की है कि वह 6 जून को भारत लौटकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। प्रदर्शन से पहले समर्थकों को एयरपोर्ट पर जुटने और फिर जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग का अभियान है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ क्षेत्रीय राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रदर्शन को समर्थन देने की घोषणा की है। इससे यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वास्तविक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि यह आंदोलन इंटरनेट की एक क्षणिक लहर भी साबित हो सकता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स का दावा करने वाला यह अभियान जमीन पर कितनी भीड़ जुटा पाएगा। दूसरी ओर समर्थकों का मानना है कि यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि युवाओं के बढ़ते असंतोष का प्रतीक है।
अब 6 जून का जंतर-मंतर प्रदर्शन कई सवालों के जवाब देगा। क्या यह आंदोलन सोशल मीडिया की सीमाओं को पार कर वास्तविक जनआंदोलन का रूप ले पाएगा? क्या शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आएंगे? या फिर यह भी इंटरनेट की दुनिया में उठी कई अन्य लहरों की तरह समय के साथ फीका पड़ जाएगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन इतना तय है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने देशभर में युवाओं की नाराजगी और उम्मीदों को एक नई पहचान जरूर दे दी है।



