Sunday, March 15, 2026

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दानिश सिद्दीकी को मिला पुलित्जर पुरस्कार मासूम हाथों ने थामा वालिद का पुरस्कार, तालियां बजाते हुए नम हुईं हर किसी की आंखें

दानिश सिद्दीकी ने दुनियाभर के संघर्षों को बड़े पैमाने पर कवर किया. उनको 2018 में रोहिंग्या शरणार्थी संकट कवरेज करने के लिए फीचर फोटोग्राफी के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला था. यह उनको दूसरा पुलित्जर पुरस्कार मिला है.

तस्वीरें जीवंत होती हैं, अपने आप में एक कहानी होती है. वो अफसाना जिसका चश्मदीद सिर्फ एक ही इंसान होता है. जब चारो तरफ गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज रही थी. लोग सिर्फ अपनी जान बचाने के लिए यहां से वहां भाग रहे थे. कोई भी कोना मिल जाता था बस वहीं पर अपनी हिफाजत के लिए लोग छिप रहे थे. जून का महीना था. तालिबान चारों तरफ से अफगानिस्तान की राजधानी की ओर बढ़ रहा था. सैकड़ों लोगों की लाशें जमीन में यूं बिखरीं पड़ीं थीं मानों खून से होली हुई हो. तब भारत के फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी ने तय किया कि वो अपने कैमरे से अफगानिस्तान का खौफनाक मंजर पूरी दुनिया के सामने लाएंगे. जी हां, वही दानिश जिनके मासूम बच्चों ने आज पिता का सम्मान लिया. क्योंकि उनके पिता उसी युद्ध की तस्वीरें खींचते हुए एक मिसाइल का शिकार हो गए और उनकी मौत हो गई.

आज जिसने भी ये तस्वीर देखी वो अपने आंसुओं को रोक नहीं पाया. दानिश सिद्दीकी तो न जानें कितनी कहानियों को तस्वीर में समेट कर चले गए मगर उनके पीछे दो मासूम बच्चे यूनुस और सारा सिद्दीकी. यूनुस छह साल का है और सारा चार साल की. आज न्यूयॉर्क में इन दोनों बच्चों ने पिता का सम्मान लिया. दोनों के मासूम चेहरे गवाह थे उनके पिता ने जरूर कोई ऐसा काम किया है जिससे इतने लोग तालियां बजा रहे हैं.

पिता का सीना गर्व से चौड़ा

दानिश सिद्दीकी ने दुनियाभर के संघर्षों को बड़े पैमाने पर कवर किया. उनको 2018 में रोहिंग्या शरणार्थी संकट कवरेज करने के लिए फीचर फोटोग्राफी के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला था. यह उनको दूसरा पुलित्जर पुरस्कार मिला है. दानिश के पिता अख्तर सिद्दीकी ने तब कहा था कि वह अपने बेटे के काम से मिलने वाले सम्मान से बहुत खुश हैं. दानिश आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन वह हमें गौरवान्वित और खुश करना जारी रखता है. पुलित्जर पुरस्कार उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और मूल्य-आधारित पत्रकारिता के लिए है.

आज जिसने भी ये तस्वीर देखी वो अपने आंसुओं को रोक नहीं पाया. दानिश सिद्दीकी तो न जानें कितनी कहानियों को तस्वीर में समेट कर चले गए मगर उनके पीछे दो मासूम बच्चे यूनुस और सारा सिद्दीकी. यूनुस छह साल का है और सारा चार साल की. आज न्यूयॉर्क में इन दोनों बच्चों ने पिता का सम्मान लिया. दोनों के मासूम चेहरे गवाह थे उनके पिता ने जरूर कोई ऐसा काम किया है जिससे इतने लोग तालियां बजा रहे हैं.

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