
ATM का असली आविष्कारक कौन? जिस शख्स ने PIN बनाया, उसे मिला था सिर्फ £10 का बोनस
1966 में जेम्स गुडफेलो ने PIN आधारित कैश मशीन का पेटेंट कराया था। उनसे एक साल बाद पहला कैश मशीन लंदन में शुरू हुआ, लेकिन आविष्कार का श्रेय लंबे समय तक किसी और को मिलता रहा।

रांची। आज ATM हमारे लिए इतना आम हो चुका है कि बैंक से पैसे निकालने के लिए बैंक की लाइन में लगने की जरूरत ही नहीं पड़ती। कार्ड डालिए, PIN डालिए और कुछ ही सेकेंड में कैश हाथ में। लेकिन क्या आपको पता है कि जिस PIN सिस्टम का इस्तेमाल हम आज करते हैं, उसके पीछे किसका दिमाग था?
ATM के आविष्कार का इतिहास थोड़ा दिलचस्प है। लंबे समय तक कैश मशीन बनाने का श्रेय स्कॉटलैंड में जन्मे जॉन शेफर्ड-बैरन को दिया जाता रहा। लेकिन जिस कार्ड और PIN तकनीक पर आज के ATM सिस्टम की नींव टिकी है, उसका पेटेंट जेम्स गुडफेलो ने कराया था।
1966 में कराया था PIN सिस्टम का पेटेंट

जेम्स गुडफेलो उस समय ग्लासगो की कंपनी Kelvin Hughes में डेवलपमेंट इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। बैंकों के सामने उस समय एक बड़ी समस्या थी। बैंक कर्मचारी चाहते थे कि शनिवार को भी छुट्टी मिले, जबकि आम लोगों के पास सप्ताह के दिनों में बैंक जाने का समय नहीं होता था। ऐसे में जरूरत थी ऐसी मशीन की, जिससे बैंक बंद रहने के दौरान भी ग्राहक अपने पैसे निकाल सकें।
लेकिन सवाल था—मशीन यह कैसे पहचानेगी कि पैसे निकालने वाला व्यक्ति असली ग्राहक है?
यहीं आया PIN का आइडिया

उस समय फिंगरप्रिंट, आवाज या आंख की पहचान जैसी बायोमेट्रिक तकनीक आज की तरह विकसित नहीं थी। इसलिए गुडफेलो ने एक अलग तरीका सोचा। उन्होंने Personal Identification Number यानी PIN का आइडिया दिया। ग्राहक के पास एक कार्ड हो और उसके साथ एक गुप्त नंबर, जिसे ग्राहक और बैंक जानते हों। मशीन कार्ड और PIN के जरिए ग्राहक की पहचान की पुष्टि कर सके।
यही आइडिया आगे चलकर आधुनिक ATM सिस्टम की महत्वपूर्ण नींव बना। गुडफेलो ने मई 1966 में अपने सिस्टम का पेटेंट दर्ज कराया, यानी पहला ATM सार्वजनिक रूप से शुरू होने से एक साल से भी ज्यादा पहले।
पहला कैश मशीन किसने बनाया था?

दिलचस्प बात यह है कि पहला कैश मशीन सार्वजनिक तौर पर 27 जून 1967 को लंदन के एनफील्ड में Barclays की शाखा में शुरू हुआ था। इसे अभिनेता Reg Varney ने इस्तेमाल किया था। इस मशीन को John Shepherd-Barron ने विकसित किया था। हालांकि उनका सिस्टम आज के ATM से काफी अलग था।
इसमें प्लास्टिक कार्ड की जगह ऐसे चेक इस्तेमाल होते थे, जिनमें Carbon-14 नाम का पदार्थ मौजूद था। मशीन उस चेक को पहचानती थी और फिर PIN के जरिए प्रक्रिया पूरी होती थी।
फिर किसे मिला ATM के आविष्कार का श्रेय?

शेफर्ड-बैरन की मशीन गुडफेलो की मशीनों से करीब एक महीने पहले इस्तेमाल में आ गई थी। इसी वजह से लंबे समय तक उन्हें कैश मशीन के आविष्कारक के तौर पर ज्यादा पहचान मिली। वहीं गुडफेलो का सिस्टम बाद में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक कार्ड और PIN आधारित ATM का आधार बना।
गुडफेलो ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके लिए मशीन को सबसे पहले सड़क पर उतारना जरूरी नहीं था। उनके मुताबिक, असली चुनौती सिस्टम को सही तरीके से काम करने लायक बनाना था।
आविष्कार के बदले मिले सिर्फ £10
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतने महत्वपूर्ण आविष्कार के लिए जेम्स गुडफेलो को शुरुआत में सिर्फ 10 पाउंड का बोनस मिला था। हालांकि बाद के वर्षों में उनके योगदान को व्यापक रूप से पहचान मिली। ATM और PIN तकनीक के विकास में उनकी भूमिका को लेकर उन्हें सम्मान भी मिला।
आज दुनिया भर में करोड़ों लोग जिस सिस्टम के जरिए कुछ सेकेंड में अपने बैंक खाते से पैसे निकालते हैं, उसके पीछे जेम्स गुडफेलो का वह आइडिया था, जो 1960 के दशक में बैंकिंग की एक बड़ी समस्या का समाधान तलाशते हुए आया था।




