न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजर अब होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर टिक गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने इस अहम समुद्री मार्ग को लेकर शुक्रवार (3 अप्रैल) को आपात बैठक बुलाई है । इस UNSC emergency meeting oil crisis का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के क्षेत्र में कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा सुनिश्चित करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर वोटिंग कराना है ।
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है और इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है । आइए जानते हैं इस UNSC emergency meeting oil crisis से जुड़ी हर अहम बात, प्रस्ताव का विवरण और भारत पर इसके प्रभाव के बारे में।
UNSC emergency meeting oil crisis: बहरीन का प्रस्ताव – क्या है इसमें?

UNSC emergency meeting oil crisis के केंद्र में बहरीन (Bahrain) द्वारा प्रस्तुत एक ड्राफ्ट प्रस्ताव है, जिसे छह खाड़ी देशों और जॉर्डन का समर्थन प्राप्त है ।
‘डिफेंसिव मीन्स’ का प्रावधान
इस प्रस्ताव में सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए “सभी आवश्यक रक्षात्मक साधनों (all defensive means necessary)” का उपयोग करने का अधिकार देने की बात कही गई है । यह प्रस्ताव कम से कम छह महीने की अवधि के लिए लागू रहेगा ।
रूस और चीन का विरोध
हालांकि, प्रस्ताव के शुरुआती ड्राफ्ट में “सभी आवश्यक साधनों (all necessary means)” का प्रावधान था, जिसका अर्थ सैन्य कार्रवाई भी हो सकता था । रूस और चीन ने इसका कड़ा विरोध किया, जिसके बाद प्रस्ताव को चार बार संशोधित किया गया और अब इसमें ‘रक्षात्मक’ शब्द जोड़ा गया है । चीन के संयुक्त राष्ट्र राजदूत फू कांग ने स्पष्ट किया कि बल के उपयोग को अधिकृत करना “बल के अवैध और अंधाधुंध इस्तेमाल को वैध ठहराना” होगा, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है ।
UNSC emergency meeting oil crisis: भारत की भूमिका और स्थिति
UNSC emergency meeting oil crisis में भारत ने भी सक्रिय भूमिका निभाई है और अपनी चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखा है।
60 से अधिक देशों की बैठक में हिस्सा
इससे पहले, ब्रिटेन की अध्यक्षता में 60 से अधिक देशों की एक आभासी बैठक हुई, जिसमें भारत ने भाग लिया । भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी (Vikram Misri) ने इस बैठक में कहा कि “अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से नेविगेशन की स्वतंत्रता और अबाधित पारगमन” सुनिश्चित किया जाना चाहिए ।
‘एकमात्र देश’ जिसने मारिनर्स खोए
मिसरी ने इस UNSC emergency meeting oil crisis के दौरान यह भी उल्लेख किया कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने फारस की खाड़ी में व्यापारी जहाजों पर हमलों में अपने नाविकों (मारिनर्स) को खोया है । उन्होंने संकट को कम करने और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर दिया ।
UNSC emergency meeting oil crisis: भारत पर क्या असर पड़ेगा?
UNSC emergency meeting oil crisis का भारत पर सीधा और गहरा प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर है।
ईरान से राहत – ‘सुरक्षित हाथों में हैं भारतीय’
तनाव के बीच, ईरान ने भारत के लिए राहत भरी घोषणा की है। ईरान के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर कहा, “हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं, कोई चिंता नहीं” । ईरान ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का भविष्य केवल ईरान और ओमान तय करेंगे । भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है (चीन, रूस, इराक, पाकिस्तान के साथ) जिन्हें ईरान से सशर्त पारगमन की अनुमति मिली है ।
तेल की कीमतों में उछाल
होर्मुज संकट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें तेजी से बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं । शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम भी महंगे हो गए हैं, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ने की आशंका बढ़ गई है ।
विमानन ईंधन (ATF) पर भी असर
भारत में विमानन ईंधन (Aviation Turbine Fuel – ATF) की कीमतों पर भी इस संकट का गहरा असर पड़ा है। दिल्ली में ATF की कीमत बढ़कर 2,07,341 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जो पिछले महीने से दोगुने से अधिक है । हालांकि, सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में मासिक वृद्धि को 25% तक सीमित कर दिया है ।
UNSC emergency meeting oil crisis: UNSC बैठक से क्या उम्मीद?
UNSC emergency meeting oil crisis के बाद, सबकी निगाहें अब प्रस्ताव पर वोटिंग के नतीजे पर टिकी हैं।
चार अप्रैल को होगी वोटिंग
शुरुआत में शुक्रवार को होने वाली वोटिंग को संयुक्त राष्ट्र में छुट्टी के कारण शनिवार (4 अप्रैल) तक के लिए स्थगित कर दिया गया है । इस प्रस्ताव को पारित होने के लिए कम से कम 9 वोटों की आवश्यकता होगी, और पांच स्थायी सदस्यों (अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस) में से किसी के वीटो (Veto) से यह विफल हो सकता है ।
अमेरिका की भूमिका पर सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि होर्मुज से गुजरने वाले तेल पर निर्भर देशों को इस मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए । इस बयान ने अमेरिका की भूमिका को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसके चलते देश ‘प्लान बी’ (Plan B) के तौर पर वैकल्पिक कूटनीतिक और आर्थिक उपायों पर काम कर रहे हैं ।
UNSC emergency meeting oil crisis: निष्कर्ष
UNSC emergency meeting oil crisis ने एक बार फिर दिखा दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई की जीवनरेखा है । यहां पैदा हुआ संकट पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर सकता है। भारत ने अपनी चिंताएं स्पष्ट रूप से रखी हैं और ईरान से राहत भी मिली है, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति में अनिश्चितता बनी हुई है । अब सबकी नजर यूएनएससी के शनिवार को होने वाले ऐतिहासिक वोट पर टिकी है—क्या कोई समाधान निकल पाएगा या हालात और बिगड़ेंगे, यह आने वाले दिनों में साफ होगा ।
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