
जेलेंस्की का पुतिन को खुला पत्र: “आइए आमने-सामने बैठकर युद्ध खत्म करें”
कीव/मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक खुला पत्र लिखा है। 4 जून को प्रकाशित इस पत्र में जेलेंस्की ने जहां रूस की सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की, वहीं पहली बार सार्वजनिक रूप से पुतिन को आमने-सामने शांति वार्ता का प्रस्ताव भी दिया।
जेलेंस्की ने अपने पत्र में कहा कि यह युद्ध किसी वास्तविक कारण के बिना शुरू किया गया था और इतिहास इसे पुतिन के व्यक्तिगत निर्णय के रूप में याद रखेगा। उन्होंने पुतिन से आग्रह किया कि वे किसी तटस्थ देश में सीधे मुलाकात करें ताकि युद्ध समाप्त करने का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
“यह युद्ध आपका व्यक्तिगत फैसला था”
जेलेंस्की ने पत्र में लिखा कि चाहे रूस नाटो, भू-राजनीति या रूसी भाषा का कितना भी मुद्दा उठाए, लेकिन इस युद्ध का फैसला अंततः पुतिन का व्यक्तिगत निर्णय था।
उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच कभी व्यापार, सांस्कृतिक सहयोग और नागरिक संबंधों की चर्चा होती थी, लेकिन अब बातचीत केवल मिसाइल हमलों, सैनिकों की मौत और विनाश तक सीमित रह गई है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि पुतिन अपने 26 वर्षों के शासनकाल का लगभग आधा समय युद्धों में बिता चुके हैं और इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
रूस में बढ़ रही नाराजगी का दावा
जेलेंस्की ने दावा किया कि युद्ध का असर अब रूस के भीतर भी साफ दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई, ईंधन संकट, आर्थिक प्रतिबंधों और संभावित नई सैन्य भर्ती से रूसी जनता परेशान है।
पत्र में उन्होंने लिखा, “रूसी नागरिक लगातार बढ़ती कीमतों, पेट्रोल की कमी और अनिश्चित भविष्य से खुश नहीं हैं। उन्हें यह भी पसंद नहीं है कि इस युद्ध का अंत नजर नहीं आ रहा।”
“यूक्रेन ने दुनिया की उम्मीदों से ज्यादा संघर्ष किया”
जेलेंस्की ने कहा कि जब रूस ने पूर्ण पैमाने पर हमला शुरू किया था तब दुनिया के कई देशों को संदेह था कि यूक्रेन ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाएगा।
उन्होंने कहा, “रूस ने यूक्रेन के प्रतिरोध को कम आंका था। लेकिन यूक्रेन ने अपने नागरिकों के साहस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मदद से खुद को बचाए रखा।”
जेलेंस्की ने यह भी कहा कि यूक्रेन को दुनिया भर से आर्थिक सहायता, सैन्य समर्थन और कूटनीतिक सहयोग मिला, जबकि रूस को लगातार प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा।
रूस पर अंतरराष्ट्रीय अलगाव का आरोप
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने दावा किया कि रूस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से अधिक अलग-थलग पड़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रूस को अब उत्तर कोरिया जैसे देशों से मदद मांगनी पड़ रही है, जो उसके कमजोर होते वैश्विक प्रभाव का संकेत है।
जेलेंस्की ने यह भी आरोप लगाया कि रूस आर्थिक रूप से चीन पर पहले से कहीं अधिक निर्भर हो गया है। उनके अनुसार यह रूस के इतिहास में पहली बार है जब मॉस्को को इतनी गहरी आर्थिक निर्भरता का सामना करना पड़ रहा है।
युद्ध को 2028 तक बढ़ाने की योजना?
जेलेंस्की ने अपने पत्र में दावा किया कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों के पास ऐसे संकेत हैं कि रूस युद्ध को 2027 और 2028 तक जारी रखने की योजना बना रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रूस बेलारूस को भी संघर्ष में और अधिक शामिल करने की कोशिश कर रहा है तथा पड़ोसी देशों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है।
हालांकि रूस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सीधे शांति वार्ता का प्रस्ताव
तीखी आलोचनाओं के बावजूद जेलेंस्की के पत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शांति वार्ता का प्रस्ताव रहा।
उन्होंने लिखा, “यूक्रेन इस युद्ध को समाप्त करना चाहता है।”
जेलेंस्की ने सुझाव दिया कि रूस और यूक्रेन के नेता किसी तटस्थ देश जैसे स्विट्जरलैंड, तुर्किये या किसी अरब देश में आमने-सामने मुलाकात करें और सीधे बातचीत के जरिए समाधान तलाशें।
उन्होंने कहा, “बड़े फैसले हमेशा नेताओं द्वारा लिए जाते हैं और इस बार भी ऐसा ही होना चाहिए।”
युद्धविराम और कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव
विश्वास बहाली के कदम के तौर पर यूक्रेन ने वार्ता के दौरान पूर्ण युद्धविराम लागू करने की पेशकश की है।
जेलेंस्की ने कहा कि बातचीत की अवधि में यूक्रेन पूर्ण सीजफायर के लिए तैयार है।
इसके साथ ही उन्होंने युद्धबंदियों की “ऑल-फॉर-ऑल” अदला-बदली का प्रस्ताव भी रखा और युद्ध के दौरान रूस ले जाए गए नागरिकों तथा बच्चों की वापसी की मांग की।
अमेरिका और यूरोप की भूमिका जरूरी
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी संभावित शांति समझौते में यूरोप और अमेरिका दोनों की भागीदारी आवश्यक होगी।
उनके अनुसार पश्चिमी देशों की भागीदारी सुरक्षा गारंटी देने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करेगी।
पुतिन को अंतिम संदेश
पत्र के अंत में जेलेंस्की ने स्पष्ट चेतावनी भी दी।
उन्होंने कहा कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो यूक्रेन अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा।
उन्होंने लिखा, “आप इस युद्ध को समाप्त कर सकते हैं। फैसला आपके हाथ में है।”
विश्लेषकों का मानना है कि पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब जेलेंस्की ने सार्वजनिक रूप से इतनी स्पष्ट भाषा में पुतिन को सीधे वार्ता का प्रस्ताव दिया है। हालांकि फिलहाल दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की संभावना अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।



