CJP प्रदर्शन: छात्र को ₹5 लाख का बॉन्ड नोटिस देने वाले ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट निलंबित, सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दी जानकारी

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छात्र को ₹5 लाख का बॉन्ड नोटिस देने वाला मजिस्ट्रेट निलंबित, सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दी जानकारी
छात्र को ₹5 लाख का बॉन्ड नोटिस देने वाला मजिस्ट्रेट निलंबित, सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दी जानकारी
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नई दिल्ली: ग्रेटर नोएडा में एक छात्र को CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में ₹5 लाख का निजी बॉन्ड भरने का नोटिस जारी करने वाले कार्यपालक मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी।

मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। छात्र ने कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी नोटिस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। आरोप था कि वह छात्रों को CJP के प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था और छात्रों के बीच कथित रूप से सरकार विरोधी भ्रामक बातें फैला रहा था।

नोटिस में छात्र से ₹5 लाख का व्यक्तिगत बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो जमानतदार देने को कहा गया था। यह बॉन्ड छह महीने के लिए शांति बनाए रखने की शर्त पर मांगा गया था।

छात्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि नोटिस में किसी विशेष तारीख, समय, बयान या हिंसा की ठोस घटना का उल्लेख नहीं किया गया था। यह भी कहा गया कि आरोपों के समर्थन में कोई सामग्री छात्र को उपलब्ध नहीं कराई गई।

नोटिस 4 सितंबर को जारी किया गया था और छात्र को 5 सितंबर को पेश होने के लिए कहा गया था। याचिका में दलील दी गई कि छात्र को वकील से सलाह लेने, आरोप समझने और जमानतदारों की व्यवस्था करने के लिए केवल एक दिन का समय मिला।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पी. वी. दिनेश ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को कड़ा संदेश जाना चाहिए। इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि संबंधित कार्यपालक मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी मामले पर सख्त रुख दिखाया। अदालत ने इससे पहले छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था।

अक्षत त्रिपाठी ने अपनी याचिका में यह भी कहा कि शांतिपूर्ण धरने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकार के दायरे में आता है।

मामला सुप्रीम कोर्ट में Akshat Tripathi बनाम State of U.P. & Others के नाम से दर्ज है।

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