“पहले युद्ध में राजा बंदी बनते थे, अब चुनाव में नेता?”लोकतंत्र में हारने वाला विरोधी है या युद्धबंदी? पढ़िए अबुआ न्यूज़ झारखंड का विशेष संपादकीय।
लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यहाँ सत्ता स्थायी नहीं होती। जनता कभी किसी को सिंहासन पर बैठाती है तो कभी उसे विपक्ष की कुर्सी पर भेज देती है। चुनाव में जीत और हार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है। आज जो विजेता है, कल वह पराजित भी हो…





