Sahibganj: रक्षाबंधन पर पेड़ों को राखी बांधकर लिया रक्षा का संकल्प, जानें क्यों खास था यह त्योहार
रक्षाबंधन का त्योहार आमतौर पर भाई-बहन के रिश्ते और आपसी प्रेम के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार Sahibganj और चाकुलिया में रक्षाबंधन पर प्रकृति के साथ रिश्ते की एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली। Sahibganj के वन प्रमंडल की अपील पर फॉसिल्स पार्क समेत आसपास के गांवों में ग्रामीणों ने पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा और संरक्षण का संकल्प लिया। यह पहल सिर्फ एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही, बल्कि Sahibganj से चाकुलिया तक ग्रामीणों ने जंगल और पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया।
विषय सूची
- Sahibganj: पेड़ों को राखी बांधकर लिया रक्षा का संकल्प
- सुनसुनिया जंगल में पद्मश्री जमुना टुडू ने बांधा रक्षा सूत्र
- Sahibganj में वनकर्मियों और ग्रामीणों की अनोखी पहल
- पेड़ों की कटाई से प्रभावित होता है पर्यावरण
- Sahibganj: प्रकृति से जुड़ा यह संदेश
1. Sahibganj: पेड़ों को राखी बांधकर लिया रक्षा का संकल्प
Sahibganj में रक्षाबंधन के मौके पर वृक्ष रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। Sahibganj वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रवल कुमार गर्ग की अपील पर Sahibganj के मंडरो वन क्षेत्र के फॉसिल्स पार्क समेत आसपास के गांवों में ग्रामीणों ने पेड़ों को राखी बांधी। Sahibganj के इस कार्यक्रम के दौरान वन रक्षी अंकित कुमार झा ने ग्रामीणों को पेड़ों और जंगलों के महत्व के बारे में जानकारी दी और Sahibganj के लोगों से पौधों की देखभाल करने और जंगलों के संरक्षण में सहयोग देने की अपील की।
Sahibganj के इस आयोजन के बारे में वन प्रमंडल पदाधिकारी ने बताया कि पेड़ों को राखी बांधने का यह संदेश Sahibganj से पूरे राज्य में फैलेगा और लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होंगे। Sahibganj के ग्रामीणों ने पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया।
2. सुनसुनिया जंगल में पद्मश्री जमुना टुडू ने बांधा रक्षा सूत्र
Sahibganj के अलावा पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया प्रखंड की भातकुंडा पंचायत के सुनसुनिया जंगल में भी रक्षाबंधन के मौके पर ग्रामीणों ने पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान लोगों ने जंगल की सुरक्षा करने और पेड़ों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाने का संकल्प लिया।
सुनसुनिया जंगल में आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के लिए जानी जाने वाली पद्मश्री जमुना टुडू भी शामिल हुईं। उन्होंने खुद पेड़ों को राखी बांधी और ग्रामीणों का उत्साह बढ़ाया। जमुना टुडू ने लोगों से अपील की कि पर्यावरण संरक्षण को केवल किसी एक दिन तक सीमित न रखें। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी लगाए गए पौधों की देखभाल करना और पुराने पेड़ों को सुरक्षित रखना भी है।
3. Sahibganj में वनकर्मियों और ग्रामीणों की अनोखी पहल
Sahibganj वन प्रमंडल ने इस अनोखी पहल के जरिए ग्रामीणों को जंगलों के महत्व के बारे में जागरूक किया। Sahibganj के वन रक्षी अंकित कुमार झा ने कहा कि Sahibganj में वृक्ष पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ मानव जीवन के लिए भी बेहद जरूरी हैं। Sahibganj के इस कार्यक्रम में ग्रामीणों और वनकर्मियों ने पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया।
Sahibganj के कार्यक्रम में ग्राम प्रधान, वनकर्मी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। Sahibganj में ग्रामीणों का कहना था कि जिस तरह भाई अपनी बहन की मुश्किल वक्त में रक्षा करता है, उसी तरह पेड़ भी इंसानों को कई प्राकृतिक चुनौतियों से बचाते हैं।
4. पेड़ों की कटाई से प्रभावित होता है पर्यावरण
Sahibganj और चाकुलिया में आयोजित कार्यक्रमों में ग्रामीणों ने जंगलों की लगातार हो रही कटाई को लेकर चिंता जताई। Sahibganj के लोगों का कहना था कि पेड़ों की संख्या कम होने का सीधा असर पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन पर पड़ता है। Sahibganj में जंगल कम होने से मिट्टी का कटाव बढ़ता है, तापमान में वृद्धि होती है और बारिश के प्राकृतिक चक्र पर भी असर पड़ सकता है।
Sahibganj के इस आयोजन के माध्यम से ग्रामीणों ने संदेश दिया कि जंगलों की सुरक्षा केवल पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से भी जुड़ी हुई है।
5. Sahibganj: प्रकृति से जुड़ा यह संदेश
Sahibganj से लेकर चाकुलिया तक रक्षाबंधन पर पेड़ों को राखी बांधने की यह अनोखी पहल Sahibganj के उन ग्रामीणों की सोच को दर्शाती है जो प्रकृति को परिवार का सदस्य मानते हैं। Sahibganj के इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जंगल सुरक्षित रहेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। Sahibganj में पेड़ों को राखी बांधने की इस परंपरा ने यह साबित कर दिया कि इंसान और प्रकृति के रिश्ते को भी त्योहारों के जरिए मजबूत किया जा सकता है।
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