
नेमरा में रूपी सोरेन का श्राद्धकर्म: 18 अक्टूबर को संस्कार भोज, 2300 जवान तैनात, एक लाख से अधिक लोगों के पहुंचने की उम्मीद
Hemant Soren’s Mother Rupi Soren’s Shradh Ceremony in Nemra: Grand Feast on October 18, 2,300 Security Personnel Deployed

Abua News Jharkhand | रामगढ़ | 17 अक्टूबर 2026
रामगढ़, झारखंड: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिवंगत माता स्वर्गीय रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म और संस्कार भोज को लेकर रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित पैतृक गांव नेमरा में व्यापक तैयारियां की गई हैं। 17 अक्टूबर को संथाली परंपरा के अनुसार दशकर्म की रस्में निर्धारित हैं, जबकि रविवार, 18 अक्टूबर को संस्कार भोज का आयोजन किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। आयोजन की व्यापकता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण और अन्य व्यवस्थाओं के लिए विशेष तैयारी की है।
18 अक्टूबर को संस्कार भोज, एक लाख से अधिक लोगों के आने की उम्मीद
स्वर्गीय रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म के बाद 18 अक्टूबर को नेमरा में बड़े पैमाने पर संस्कार भोज आयोजित किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस आयोजन में एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
संस्कार भोज के लिए गांव में तीन बड़े पंडाल तैयार किए गए हैं। बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के भोजन की व्यवस्था के लिए विशेष रसोई बनाई गई है, जहां मिठाइयों और अन्य व्यंजनों को तैयार करने का काम चल रहा है।
आयोजन स्थल पर पेयजल, बैठने की व्यवस्था तथा आगंतुकों की सुविधा का भी ध्यान रखा जा रहा है। गांव और आसपास के इलाकों में लोगों की संभावित आवाजाही को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां की गई हैं।
सुरक्षा के लिए 14 IPS, 42 DSP और 2300 अतिरिक्त जवान
संस्कार भोज में संभावित भारी भीड़ तथा विशिष्ट अतिथियों के आगमन को देखते हुए रामगढ़ और नेमरा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 14 अतिरिक्त आईपीएस अधिकारी, 42 डीएसपी और करीब 2300 अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
इन अधिकारियों और जवानों को 18 अक्टूबर के कार्यक्रम के बाद 19 अक्टूबर की सुबह तक सुरक्षा व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारियों को दंडाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता आयोजन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के साथ आगंतुकों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं देख रहे तैयारियां
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी माता के निधन के बाद से पैतृक गांव नेमरा में पारिवारिक परंपराओं के अनुसार श्राद्धकर्म की रस्मों में शामिल हो रहे हैं।
उन्होंने संस्कार भोज की तैयारियों का स्वयं निरीक्षण किया है। आयोजन स्थल पर बनाए जा रहे पंडाल, भोजन व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का जायजा लेते हुए व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी दिवंगत माता को याद करते हुए पारंपरिक रस्में भी निभाईं। भोजन बनाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए उन्होंने स्वयं चूल्हा जलाने की परंपरा का निर्वहन किया।
संथाली परंपराओं के अनुसार हो रहे श्राद्धकर्म के अनुष्ठान
रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म का आयोजन संथाली सामाजिक और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार किया जा रहा है।
इस दौरान परिवार के सदस्य दिवंगत आत्मा की स्मृति में पारंपरिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी दातून, पानी और भोजन अर्पित करने जैसी परंपरागत रस्में निभाई हैं।
संस्कार भोज के लिए हिंदी और संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि में निमंत्रण पत्र तैयार कर लोगों को आमंत्रित किया गया है। इससे आयोजन में स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक पहचान का विशेष महत्व भी सामने आता है।
मुख्यमंत्री के ननिहाल से पहुंची पारंपरिक सामग्री
श्राद्धकर्म से जुड़ी संथाली परंपराओं के अंतर्गत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ननिहाल की ओर से भी विशेष सामग्री नेमरा पहुंचाई गई है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ननिहाल से खस्सी, हड़िया और माचिस जैसी सामग्री भेजी गई है। इनका संबंध परिवार और समुदाय की पारंपरिक रस्मों से बताया जा रहा है।
मां के शोक के बीच जनसेवा का दायित्व भी निभा रहे मुख्यमंत्री
अपनी माता के निधन से उत्पन्न व्यक्तिगत शोक के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नेमरा में लोगों से मुलाकात भी की है।
पिछले दिनों उन्होंने गांव पहुंचे नागरिकों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। दिव्यांगजनों की समस्याओं को लेकर भी अधिकारियों से कार्रवाई करने को कहा गया।
वहीं, कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और शुभचिंतक नेमरा पहुंचकर स्वर्गीय रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके हैं।
नेमरा में जुटेंगे बड़ी संख्या में शुभचिंतक
नेमरा गांव सोरेन परिवार का पैतृक गांव है। पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार से जुड़े होने के कारण इस गांव का झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक पहचान में विशेष स्थान है।
रूपी सोरेन के निधन के बाद से ही परिवार के शुभचिंतक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग गांव पहुंच रहे हैं। 18 अक्टूबर के संस्कार भोज में भी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति की संभावना है।
सुरक्षा और सुविधाओं पर प्रशासन की विशेष नजर
18 अक्टूबर को होने वाले संस्कार भोज के दौरान प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारी संख्या में आने वाले आगंतुकों के बीच यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना होगी।
पुलिस अधिकारियों और अतिरिक्त जवानों की तैनाती इसी उद्देश्य से की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में कार्यक्रम को व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की तैयारी है।
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