Resaldar Baba Urs 2026: रांची में प्रेम, शांति और भाईचारे की आध्यात्मिक सभा, CM ने चढ़ाई चादर
रांची के डोरंडा स्थित हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार बाबा की दरगाह पर Resaldar Baba Urs 2026 का 219वां वार्षिक उर्स मुबारक धूमधाम से मनाया गया । Resaldar Baba Urs 2026 के इस पवित्र आयोजन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शिरकत की और परंपरा के अनुसार मजार पर चादरपोशी कर राज्य की सुख-समृद्धि, अमन-चैन और खुशहाली के लिए दुआ मांगी ।
Resaldar Baba Urs 2026: 219वें उर्स की शुरुआत और परंपराएं
Resaldar Baba Urs 2026 की शुरुआत 27 अगस्त 2026 को परचम कुशाई (झंडा फहराने) के साथ हुई । पांच दिवसीय Resaldar Baba Urs 2026 का आयोजन 31 अगस्त तक चला, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद (श्रद्धालु) दरगाह पर पहुंचे ।
Resaldar Baba Urs 2026 के दौरान परंपरागत रूप से कुरआनख्वानी, नात, मनकबत और कव्वाली के कार्यक्रम आयोजित किए गए । Resaldar Baba Urs 2026 में इस बार मुंबई के मशहूर कव्वालों अनीस नवाब और मुराद आतिश के बीच कव्वाली मुकाबला भी हुआ । Resaldar Baba Urs 2026 के पहले दिन दरगाह कमेटी के अध्यक्ष अय्यूब गद्दी के आवास से पहली चादर का जुलूस निकाला गया, जो डोरंडा के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरता हुआ मजार शरीफ पहुंचा ।
Resaldar Baba Urs 2026: सीएम हेमंत सोरेन की उपस्थिति
Resaldar Baba Urs 2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार 31 अगस्त को दरगाह पहुंचे और पूरी अकीदत के साथ चादरपोशी की । Resaldar Baba Urs 2026 के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार बाबा की शिक्षाएं प्रेम, भाईचारे, इंसानियत और आपसी सौहार्द का संदेश देती हैं ।
Resaldar Baba Urs 2026 के मौके पर मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की । Resaldar Baba Urs 2026 में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि झारखंड में सभी समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं और यही राज्य की सबसे बड़ी ताकत है ।
Resaldar Baba Urs 2026: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
Resaldar Baba Urs 2026 की शुरुआत 1808 में हुई थी, जब हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार बाबा की स्मृति में डोरंडा में उर्स मनाया जाने लगा । Resaldar Baba Urs 2026 से जुड़ी मान्यता है कि बाबा 17वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश भारतीय सेना की एक घुड़सवार टुकड़ी के साथ रांची आए थे, जहां वे रिसालदार (मध्य स्तर के अधिकारी) थे । Resaldar Baba Urs 2026 का यह आयोजन उनकी धार्मिकता और चमत्कारी उपचार शक्ति के लिए प्रसिद्धि को दर्शाता है।
Resaldar Baba Urs 2026 सामाजिक सद्भाव और सांप्रदायिक एकता का प्रतीक रहा है, जहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनते हैं ।
Resaldar Baba Urs 2026: श्रद्धालुओं की भागीदारी
Resaldar Baba Urs 2026 के दौरान रांची और देशभर से बड़ी संख्या में अकीदतमंद मजार पर पहुंचे । Resaldar Baba Urs 2026 के मौके पर मजार के आसपास मिठाई, चादर और अन्य सामानों की दुकानें सज गईं । Resaldar Baba Urs 2026 में श्रद्धालुओं को बाबा के आस्ताने का संदल और गुलाब जल से गुस्ल कराया गया, जिसे प्राप्त करने की होड़ मच गई ।
Resaldar Baba Urs 2026 का यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि झारखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है । Resaldar Baba Urs 2026 की सफलता में दरगाह कमेटी, प्रशासन और श्रद्धालुओं का सामूहिक योगदान रहा । Resaldar Baba Urs 2026 ने एक बार फिर यह साबित किया कि रांची में प्रेम, शांति और भाईचारे का यह आध्यात्मिक मेला हर साल लोगों को एकजुट करता है और आपसी सौहार्द का संदेश देता है ।
Hazrat Qutubuddin Risaldar Baba: CM हेमंत सोरेन ने 219वें उर्स में चढ़ाई चादर, राज्य की खुशहाली की दुआ मांगी


