हॉर्मुज में सामान्य आवाजाही बहाल होने की उम्मीद से दबाव में क्रूड, हालांकि सप्लाई संकट के कारण कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर

नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से जारी तेजी पर बुधवार को थोड़ी नरमी देखने को मिली। बाजार में ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते की उम्मीद बढ़ने के बाद तेल की कीमतों पर दबाव आया है। हालांकि, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल की आवाजाही अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है, इसलिए क्रूड की कीमतें कई महीनों के ऊंचे स्तर के आसपास बनी हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent crude करीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में इसकी कीमत करीब 12 फीसदी तक बढ़ चुकी है। वहीं, अमेरिकी WTI crude 83 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की उम्मीद
तेल बाजार की नजर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया है कि दोनों देश किसी समझौते के करीब पहुंच सकते हैं। पाकिस्तान इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच भी बातचीत आगे बढ़ने की खबर है। माना जा रहा है कि अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तेल की आवाजाही सामान्य होती है, तो बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम हो सकती है।
इसके उलट, अगर बातचीत विफल होती है या तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल सकती है।
हॉर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकता है। मौजूदा तनाव के बीच इस मार्ग से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसका असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है।
इस साल अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 40 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी सप्लाई चुनौतियों ने भी डीजल समेत पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
अमेरिका के तेल भंडार पर भी बाजार की नजर
तेल की कीमतों के लिए अमेरिका के कच्चे तेल भंडार का आंकड़ा भी महत्वपूर्ण है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के अनुसार, पिछले सप्ताह अमेरिका में कच्चे तेल का स्टॉक करीब 91 लाख बैरल बढ़ा है। अगर सरकारी आंकड़ों में भी इस बढ़ोतरी की पुष्टि होती है, तो यह फरवरी के बाद एक सप्ताह में सबसे बड़ी वृद्धि हो सकती है। तेल भंडार बढ़ने का मतलब बाजार में सप्लाई बेहतर रहने की संभावना है, जिससे कीमतों पर दबाव बन सकता है।
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति, अमेरिका-ईरान बातचीत, अमेरिकी तेल भंडार और वैश्विक मांग-सप्लाई के अनुमान पर निर्भर करेगी। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और OPEC की मासिक रिपोर्ट भी बाजार के लिए अहम होगी। इन रिपोर्टों में वैश्विक तेल मांग और आपूर्ति को लेकर नए अनुमान सामने आएंगे।
यानी फिलहाल कच्चे तेल के बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद कीमतों को नीचे ला सकती है, जबकि तनाव बढ़ने या हॉर्मुज में सप्लाई बाधित रहने की स्थिति में क्रूड एक बार फिर तेजी पकड़ सकता है।

