Mineral Rights Tax: खनिज अधिकारों पर राज्यों की टैक्स लगाने की शक्ति सीमित, केंद्र तय करेगा नियम

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राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद खान एवं खनिज संशोधन कानून लागू होने का रास्ता साफ; खनिज युक्त जमीन भी कानून के दायरे में

नई दिल्ली: खनिज अधिकारों और खनिज युक्त जमीन पर टैक्स, सेस या अन्य शुल्क लगाने के मामले में राज्यों की शक्तियों को सीमित करने वाला नया कानून सामने आ गया है। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रपति ने 17 अगस्त को विधेयक को स्वीकृति दी, जिसके बाद इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है।

हालांकि, यह संशोधित कानून केंद्र सरकार की ओर से राजपत्र में अधिसूचना जारी किए जाने की तारीख से प्रभावी होगा।

राज्य अब मनमाने तरीके से नहीं लगा सकेंगे लेवी

संशोधित कानून के तहत राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज युक्त जमीन पर अपनी ओर से टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने की शक्ति पर सीमा तय की गयी है। नई व्यवस्था में राज्य सरकार खनिज की मात्रा, उसकी कीमत, रॉयल्टी की देनदारी या किसी अन्य आधार पर ऐसी लेवी तभी लगा सकेगी, जब वह केंद्र सरकार की ओर से तय शर्तों और सीमाओं के अनुरूप हो। इससे खनिज अधिकारों पर कराधान के मामले में केंद्र सरकार की भूमिका पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।

खनिज युक्त जमीन भी कानून के दायरे में

संशोधन के जरिए ‘मिनरल बेयरिंग लैंड’ यानी खनिज युक्त जमीन को भी खान एवं खनिज अधिनियम के दायरे में शामिल किया गया है। ऐसी जमीन की पहचान निर्धारित मानकों के आधार पर की जाएगी। इसके साथ ही संशोधित कानून में धारा 9डी जोड़ी गयी है। इसी धारा में खनिज अधिकारों और खनिज युक्त जमीन पर टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने से संबंधित शर्तों और प्रतिबंधों का प्रावधान किया गया है।

पुरानी वसूली को लेकर भी प्रावधान

नए कानून में पहले से लगाए गए टैक्स, सेस या अन्य लेवी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गयी है। कानून प्रभावी होने से पहले यदि ऐसी कोई राशि राज्य सरकार ने वसूल नहीं की है या जमा नहीं हुई है, तो उसे कानून के प्रावधानों के तहत अमान्य माना जाएगा। हालांकि, जो राशि पहले ही राज्य सरकार के पास जमा हो चुकी है या वसूल की जा चुकी है, उसे वापस करने की बाध्यता नहीं होगी।

नियम और शर्तें तय करेगा केंद्र

संशोधन में खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 13 में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत केंद्र सरकार को धारा 9डी के अंतर्गत टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने से जुड़ी शर्तें और प्रतिबंध तय करने का अधिकार मिलेगा।

यानी आने वाले समय में खनिज अधिकारों पर किसी भी तरह की लेवी लगाने से पहले राज्यों को केंद्र द्वारा निर्धारित नियमों और सीमाओं का पालन करना होगा।

क्या बदला, आसान भाषा में समझें

  • खनिज अधिकारों पर राज्यों की टैक्स और सेस लगाने की शक्ति सीमित होगी।
  • खनिज युक्त जमीन भी संशोधित कानून के दायरे में आ गयी है।
  • ऐसी लेवी लगाने की शर्तें और सीमाएं केंद्र सरकार तय करेगी।
  • पहले से वसूली नहीं गयी राशि को अमान्य माना जाएगा।
  • पहले ही वसूली या जमा की जा चुकी राशि वापस नहीं करनी होगी।
  • संशोधित कानून अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रभावी होगा।

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