
Jitiya Vrat 2026: 3 अक्टूबर को रखा जाएगा जीवित्पुत्रिका व्रत, जानें नहाय-खाय से पारण तक की पूरी विधि
2 अक्टूबर से शुरू होगा तीन दिवसीय पर्व, 3 अक्टूबर को रखा जाएगा निर्जला उपवास; 4 अक्टूबर को होगा पारण

रांची: संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाने वाला जीवित्पुत्रिका व्रत यानी जिउतिया इस वर्ष 3 अक्टूबर, शनिवार को मनाया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत 2 अक्टूबर को नहाय-खाय से होगी, जबकि 4 अक्टूबर को व्रत का पारण किया जाएगा।
बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में जिउतिया का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दौरान महिलाएं संतान की सलामती और दीर्घायु के लिए कठिन निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं।
तीन दिनों में ऐसे पूरा होगा जिउतिया पर्व
2 अक्टूबर, शुक्रवार—नहाय-खाय:
पर्व के पहले दिन महिलाएं स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। कई स्थानों पर इस दिन मडुआ की रोटी और नोनी का साग खाने की परंपरा है। नहाय-खाय के बाद व्रत रखने वाली महिलाएं उपवास की तैयारी करती हैं।
3 अक्टूबर, शनिवार—निर्जला व्रत:
आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर महिलाएं निर्जला उपवास रखेंगी। इस दौरान अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता। भगवान जीमूतवाहन की पूजा कर संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
4 अक्टूबर, रविवार—पारण:
अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्धारित विधि-विधान से पूजा करने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा। इसके साथ ही तीन दिवसीय जिउतिया पर्व का समापन होगा।
क्या है जिउतिया व्रत का धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंधर्वराज जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का त्याग करने का संकल्प लिया था। उनके त्याग और बलिदान से जुड़ी मान्यता के कारण माताएं संतान की रक्षा और लंबी आयु की कामना से यह व्रत रखती हैं।
जिउतिया की पूजा में चील और सियारिन की कथा सुनने की भी परंपरा है। व्रत के दौरान इस कथा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
समय के साथ इस पर्व की परंपरा में भी बदलाव देखने को मिला है। अब कई परिवारों में माताएं केवल पुत्र ही नहीं, बल्कि बेटे और बेटी दोनों की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना से जिउतिया व्रत रखती हैं।
ध्यान दें: निर्जला व्रत कठिन होता है। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए नहाय-खाय के दिन पर्याप्त और पौष्टिक भोजन लेना चाहिए।




