मध्याह्न भोजन सामग्री खरीदने के बाद स्कूल कुबेर पोर्टल पर वाउचर अपलोड करेंगे, सत्यापन के बाद भुगतान सीधे सप्लायर के खाते में जाएगा।

झारखंड में मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal/PM POSHAN) योजना के संचालन और भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब तक मध्याह्न भोजन के लिए मिलने वाली राशि सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के बैंक खाते में भेजी जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह राशि स्कूलों या समिति के खाते में नहीं जाएगी। इसके बजाय भोजन सामग्री उपलब्ध कराने वाले दुकानदारों (सप्लायर्स) को सरकार की ओर से सीधे भुगतान किया जाएगा।
झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा। सरकार का उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और जवाबदेह बनाना है।
क्या है नई व्यवस्था?
नई प्रणाली के तहत स्कूल पहले मध्याह्न भोजन के लिए आवश्यक सामग्री जैसे दाल, सब्जी, मसाले, तेल और अन्य खाद्य सामग्री स्थानीय दुकानदारों से खरीदेंगे। इसके बाद खरीद से संबंधित बिल और वाउचर ‘कुबेर पोर्टल’ पर अपलोड किए जाएंगे। संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापन के बाद सामग्री उपलब्ध कराने वाले दुकानदार के बैंक खाते में सीधे भुगतान कर दिया जाएगा।
इस बदलाव के बाद सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के बैंक खाते में राशि भेजने और वहां से निकासी की पुरानी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। पहले समिति के अध्यक्ष और संयोजिका के संयुक्त हस्ताक्षर से राशि निकाली जाती थी।
चार महीने से नहीं मिली कुकिंग कॉस्ट
नई व्यवस्था लागू होने की तैयारी के बीच स्कूलों को पिछले करीब चार महीनों से कुकिंग कॉस्ट की राशि नहीं मिली है। अप्रैल 2026 से अब तक वित्तीय सहायता जारी नहीं होने के कारण कई सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन का संचालन प्रभावित हो रहा है।
स्कूलों को चावल के अलावा दाल, सब्जी, तेल, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री खरीदने के लिए कुकिंग कॉस्ट की राशि दी जाती है। राशि नहीं मिलने के कारण अधिकांश विद्यालय उधार लेकर भोजन योजना चला रहे हैं।
उधार लेकर चल रही है योजना
कई विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों का कहना है कि बच्चों का भोजन प्रभावित न हो, इसलिए स्थानीय दुकानदारों से उधार सामान लेकर भोजन तैयार कराया जा रहा है। लगातार भुगतान नहीं मिलने से दुकानदारों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
केंद्र और राज्य मिलकर देते हैं राशि
मध्याह्न भोजन योजना का संचालन केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से किया जाता है। योजना के लिए 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार उपलब्ध कराती है। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक कुकिंग कॉस्ट का आवंटन नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस माह के अंत तक राशि जारी होने की संभावना है।
शिक्षक संघ ने जताई चिंता
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि राशि नहीं मिलने से कई विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना बंद होने की स्थिति में पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि शिक्षक अपने स्तर पर व्यवस्था कर रहे हैं या दुकानदारों से उधार सामान लेकर बच्चों को भोजन उपलब्ध करा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद होता है तो कार्रवाई शिक्षकों पर होती है, जबकि समय पर राशि उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। संघ ने सरकार से जल्द से जल्द कुकिंग कॉस्ट जारी करने और नई भुगतान व्यवस्था को स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ लागू करने की मांग की है।
नई व्यवस्था से क्या होगा फायदा?
- स्कूलों के खाते में राशि भेजने की प्रक्रिया समाप्त होगी।
- भुगतान पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगा।
- कुबेर पोर्टल पर वाउचर अपलोड होने के बाद सीधे दुकानदारों को भुगतान मिलेगा।
- भुगतान प्रक्रिया की बेहतर निगरानी और रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
- वित्तीय अनियमितताओं की संभावना कम होने की उम्मीद है।

