Jharkhand Electricity Tariff Hike Likely Today, Consumers May See Up to 10% Increase
रांची – टीम अबुआ
झारखंड के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आज का दिन बेहद अहम साबित हो सकता है। राज्य में बिजली दरों को लेकर बड़ा फैसला होने जा रहा है। जानकारी के अनुसार, झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा कर सकता है। माना जा रहा है कि आयोग उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सीमित बढ़ोतरी के साथ करीब 10% तक दर बढ़ाने का फैसला ले सकता है।

क्या है पूरा मामला?
झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने पहले बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था। निगम ने दरों में 59% तक वृद्धि की मांग की थी, जिससे आम जनता पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ सकता था। इसके अलावा, फिक्स्ड चार्ज में भी बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया था। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक आयोग इस प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार करने के बजाय इसे कम करते हुए सीमित बढ़ोतरी का रास्ता अपना सकता है। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

कितनी बढ़ सकती हैं बिजली दरें?
प्रस्ताव के अनुसार:
- शहरी घरेलू बिजली दर: ₹6.85 से बढ़ाकर ₹10.30 प्रति यूनिट करने का सुझाव
- ग्रामीण घरेलू बिजली दर: ₹6.70 से बढ़ाकर ₹10.20 प्रति यूनिट करने की मांग
लेकिन अब संभावना है कि आयोग इन दरों को इतनी ज्यादा बढ़ाने के बजाय करीब 10% तक सीमित वृद्धि लागू करे।
उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
अगर 10% तक की बढ़ोतरी लागू होती है, तो इसका असर सीधे आम लोगों के मासिक बिजली बिल पर पड़ेगा।
- मध्यम वर्गीय परिवारों के खर्च में वृद्धि होगी
- छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा
- ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी राहत सीमित ही मिल पाएगी
हालांकि, सरकार की ओर से 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना जारी रहने की संभावना है, जिससे गरीब और निम्न आय वर्ग को कुछ राहत मिल सकती है।
क्यों जरूरी है दरों में बदलाव?
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि बिजली वितरण कंपनियों को बढ़ती लागत, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और बिजली खरीद की कीमतों के कारण दरों में संशोधन करना जरूरी हो गया है।
- कोयला और ऊर्जा उत्पादन लागत में वृद्धि
- ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस
- पुराने सिस्टम के अपग्रेड की जरूरत
इन सभी कारणों से कंपनियां घाटे में चल रही हैं, जिसे संतुलित करने के लिए दरों में बदलाव जरूरी बताया जा रहा है।
राहत बनाम बोझ: संतुलन की कोशिश
आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह कंपनियों के घाटे को भी कम करे और उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ भी न डाले। यही कारण है कि 59% प्रस्तावित बढ़ोतरी के मुकाबले केवल 10% तक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दरों में सीमित वृद्धि की जाती है, तो यह एक संतुलित निर्णय होगा। इससे कंपनियों को राहत मिलेगी और उपभोक्ताओं पर अचानक भारी बोझ नहीं पड़ेगा। झारखंड में बिजली दरों को लेकर लिया जाने वाला यह फैसला आने वाले साल में लाखों उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालेगा। अब सभी की नजरें आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और आयोग किस तरह से राहत और राजस्व के बीच संतुलन बनाते हैं।



