IndiGo को पहली तिमाही में बड़ा झटका, बढ़ती लागत से ₹238 करोड़ के घाटे में पहुंची देश की सबसे बड़ी एयरलाइन

0
4
Share This Post

यात्रियों की संख्या और राजस्व में बढ़ोतरी के बावजूद बढ़ती ईंधन कीमतों और परिचालन खर्चों के कारण IndiGo को अप्रैल-जून तिमाही में ₹238 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ। अब निवेशकों की नजर कंपनी की अगली रणनीति पर है।

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। यात्रियों की संख्या और कंपनी की आय में बढ़ोतरी के बावजूद एयरलाइन को ₹238 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज करना पड़ा। पिछले वर्ष की समान अवधि में कंपनी ने ₹2,176 करोड़ का मुनाफा कमाया था। कंपनी की कुल आय 20 प्रतिशत बढ़कर ₹24,584 करोड़ पहुंच गई, लेकिन बढ़ती परिचालन लागत ने इस बढ़त का फायदा खत्म कर दिया। अप्रैल से जून के बीच कुल ऑपरेटिंग खर्च बढ़कर ₹25,853 करोड़ हो गया, जिससे कंपनी लाभ के बजाय घाटे में पहुंच गई।

ईंधन की महंगाई बनी सबसे बड़ी चुनौती

IndiGo के मुताबिक, सबसे बड़ा दबाव एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतों से आया। कंपनी का ईंधन खर्च एक वर्ष में 86 प्रतिशत बढ़कर ₹10,833 करोड़ हो गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, जिसका सीधा असर एयरलाइंस की लागत पर पड़ा। इसके अलावा विमानों की मरम्मत, लीज़ रेंट, कर्मचारियों का वेतन और वित्तीय लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

यात्रियों की संख्या बढ़ी, लेकिन मुनाफा घटा

पहली तिमाही में IndiGo ने अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार जारी रखा। एयरलाइन फिलहाल 97 घरेलू और 46 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित कर रही है। हालांकि यात्रियों की संख्या और टिकट से होने वाली आय बढ़ी, लेकिन कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन कमजोर रहा। वहीं लोड फैक्टर भी पिछले साल की तुलना में घटकर 83.3 प्रतिशत पर आ गया।

मजबूत नकदी, लेकिन बढ़ता कर्ज

कंपनी के पास फिलहाल ₹52,885 करोड़ की नकदी और नकदी समकक्ष मौजूद हैं, जो उसकी वित्तीय स्थिति को मजबूती देते हैं। हालांकि दूसरी ओर कुल कर्ज बढ़कर ₹81,531 करोड़ हो गया है, जिससे भविष्य में ब्याज और अन्य वित्तीय लागत का दबाव बना रह सकता है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो एयरलाइंस की लागत पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि मजबूत यात्री मांग, नए अंतरराष्ट्रीय रूट और नेटवर्क विस्तार के कारण IndiGo को आने वाली तिमाहियों में प्रदर्शन सुधारने की उम्मीद है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि कंपनी बढ़ती लागत पर कितना नियंत्रण कर पाती है और दोबारा मुनाफे की राह पर कब लौटती है।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here