2025 में सड़क हादसों ने ली रिकॉर्ड 1.8 लाख से ज्यादा जानें, हर दिन औसतन 502 लोगों की मौत

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सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में देशभर में सड़क दुर्घटनाओं में 1.8 लाख से अधिक लोगों की जान गई। दुर्घटनाओं में 5.3% और मौतों में 3.5% की वृद्धि दर्ज की गई।

नई दिल्ली: देश में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में 1.8 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। यह अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है। इसका मतलब है कि पूरे वर्ष में औसतन हर दिन 502 लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई।

मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में देशभर में 5.1 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। पिछले वर्ष की तुलना में दुर्घटनाओं में 5.3 प्रतिशत और मौतों में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

18 राज्यों में बढ़ीं मौतें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सड़क हादसों से होने वाली मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसमें कमी देखने को मिली।

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बढ़ोतरी

साल 2025 में सड़क हादसों में सबसे अधिक वृद्धि उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई। यहां सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का आंकड़ा 24,118 से बढ़कर 27,550 पहुंच गया।

वहीं पंजाब ने राहत भरी तस्वीर पेश की, जहां सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या 4,759 से घटकर 3,062 रह गई।

डिजिटल डेटा सिस्टम से होगी बेहतर निगरानी

मंत्रालय ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के लिए ई-डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म दुर्घटनाओं से जुड़े डेटा का विश्लेषण कर सड़क सुरक्षा सुधारने में मदद करेगा।

आंकड़ों में हो सकता है बदलाव

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल के कुछ आंकड़े eDAR प्रणाली के माध्यम से अपडेट किए जा रहे हैं। ऐसे में अंतिम रिपोर्ट जारी होने के बाद सड़क दुर्घटनाओं और मौतों के कुल आंकड़ों में कुछ बदलाव संभव है।

सड़क हादसों के बढ़ते आंकड़े एक बार फिर यह संकेत देते हैं कि सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और जागरूकता अभियान समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुके हैं।

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