भारत में पहली डेंगू वैक्सीन QDENGA को मंजूरी, जानिए इसकी प्रभावशीलता, खुराक और कौन लगवा सकेगा टीका

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सीडीएससीओ ने जापानी कंपनी टाकेडा की QDENGA को दी मंजूरी, चारों प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षा देने वाली देश की पहली स्वीकृत वैक्सीन; दो डोज में मिलेगा टीका, पहले संक्रमण की जांच जरूरी नहीं।

नई दिल्ली: भारत ने डेंगू जैसी गंभीर और तेजी से फैलने वाली बीमारी के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने जापानी फार्मास्यूटिकल कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित QDENGA (TAK-003) को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही QDENGA भारत की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन बन गई है। विशेषज्ञ इसे देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहे हैं।

भारत में हर साल लाखों लोग डेंगू से संक्रमित होते हैं और वैश्विक डेंगू मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भारत में दर्ज होता है। पिछले दो दशकों में शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी और मच्छरों के फैलते प्रजनन क्षेत्रों के कारण डेंगू के मामलों में 11 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में इस वैक्सीन को मंजूरी मिलना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है QDENGA?

QDENGA एक Live Attenuated Tetravalent Dengue Vaccine है, जिसे इस तरह तैयार किया गया है कि यह डेंगू वायरस के सभी चार प्रकार यानी DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4 के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित कर सके। इसका उद्देश्य डेंगू संक्रमण के साथ-साथ गंभीर डेंगू और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत को कम करना है। इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की जरूरत नहीं होती कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ था या नहीं। यही वजह है कि इसे बड़े पैमाने पर टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए अधिक उपयोगी माना जा रहा है।

दो डोज में मिलेगा टीका

QDENGA को दो खुराकों में दिया जाएगा। दोनों डोज के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाएगा। यह टीका त्वचा के नीचे इंजेक्शन के माध्यम से लगाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही उन देशों में इसके उपयोग की सिफारिश कर चुका है जहां डेंगू का संक्रमण अधिक है।

40 से अधिक देशों में पहले से इस्तेमाल

भारत से पहले यह वैक्सीन यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम, ब्राजील, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना सहित 40 से अधिक देशों में मंजूरी प्राप्त कर चुकी है। अब भारत भी उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जहां डेंगू की रोकथाम के लिए इस आधुनिक वैक्सीन का उपयोग किया जा सकेगा।

भारत के लिए क्यों है अहम फैसला?

अब तक भारत में डेंगू से बचाव का मुख्य आधार मच्छर नियंत्रण, पानी जमा न होने देना, व्यक्तिगत सुरक्षा, समय पर जांच और मरीजों का सहायक उपचार था। किसी स्वीकृत वैक्सीन की अनुपस्थिति में रोकथाम के विकल्प सीमित थे। QDENGA की मंजूरी के बाद पहली बार डेंगू नियंत्रण की रणनीति में प्रभावी टीकाकरण भी शामिल हो सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मानसून और उसके बाद आने वाले डेंगू के मौसमी प्रकोपों के दौरान गंभीर मरीजों की संख्या और अस्पतालों पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सकेगा।

कौन लगवा सकेगा यह वैक्सीन?

भारत में वैक्सीन के उपयोग संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश लॉन्च के समय जारी किए जाएंगे। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर QDENGA को बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए मंजूरी दी गई है और इसे पहले डेंगू संक्रमण हो चुका है या नहीं, दोनों परिस्थितियों में लगाया जा सकता है। यह सुविधा इसे पहले उपलब्ध डेंगू वैक्सीन Dengvaxia से अलग बनाती है, क्योंकि Dengvaxia केवल उन लोगों के लिए उपयुक्त मानी जाती थी जिन्हें पहले डेंगू हो चुका हो।

कितनी प्रभावी है QDENGA?

QDENGA की प्रभावशीलता का मूल्यांकन TIDES Phase-III Clinical Trial के दौरान किया गया। इस अध्ययन में डेंगू प्रभावित आठ देशों के 20,000 से अधिक बच्चों और किशोरों को शामिल किया गया।

करीब साढ़े चार वर्ष तक किए गए फॉलो-अप में पाया गया कि यह वैक्सीन:

  • डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को 84 प्रतिशत तक कम करती है।
  • वायरस से पुष्टि किए गए डेंगू संक्रमण के खिलाफ लगभग 61 प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करती है।
  • पहले संक्रमित और पहले कभी संक्रमित न हुए दोनों प्रकार के लोगों में लंबे समय तक सुरक्षा देने में सक्षम है, हालांकि इसकी प्रभावशीलता वायरस के प्रकार के अनुसार कुछ अलग हो सकती है।

इन्हीं परिणामों के आधार पर WHO सहित कई अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्थाओं ने इसके उपयोग को मंजूरी दी है।

भारत में कीमत कितनी होगी?

फिलहाल QDENGA की आधिकारिक कीमत घोषित नहीं की गई है। हालांकि इसकी लागत कई बातों पर निर्भर करेगी, जैसे यह शुरुआत में निजी बाजार में उपलब्ध होगी या सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनेगी। टाकेडा ने हैदराबाद स्थित Biological E के साथ साझेदारी की है। इस समझौते के तहत भारत में हर वर्ष 5 करोड़ डोज तक उत्पादन की योजना है। स्थानीय उत्पादन शुरू होने से भविष्य में कीमत कम होने और आपूर्ति बेहतर होने की संभावना है।

क्या सभी लोगों को यह वैक्सीन लगवानी होगी?

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा जरूरी नहीं है। WHO का मानना है कि डेंगू नियंत्रण केवल टीकाकरण से संभव नहीं है। इसके लिए मच्छर नियंत्रण, साफ-सफाई, जनजागरूकता, समय पर जांच, निगरानी व्यवस्था और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को भी समान रूप से मजबूत करना होगा।

क्या डेंगू पूरी तरह खत्म हो जाएगा?

विशेषज्ञों के अनुसार केवल वैक्सीन से डेंगू का पूरी तरह उन्मूलन संभव नहीं है। डेंगू वायरस के चार अलग-अलग प्रकार, मच्छरों की बढ़ती संख्या, जलवायु परिवर्तन और तेजी से हो रहे शहरीकरण जैसी चुनौतियां अभी भी बनी रहेंगी। इसलिए टीकाकरण को अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के साथ मिलाकर लागू करना होगा।

भारत के लिए क्या होंगे फायदे?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि QDENGA का व्यापक स्तर पर उपयोग किया गया तो इससे गंभीर डेंगू के मामलों, अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। साथ ही Biological E के साथ साझेदारी भारत को वैश्विक स्तर पर डेंगू वैक्सीन निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र भी बना सकती है।

हालांकि वैक्सीन की उपलब्धता, कीमत और सरकारी कार्यक्रमों में शामिल किए जाने को लेकर अभी अंतिम निर्णय आने बाकी हैं, लेकिन QDENGA की मंजूरी भारत के लिए डेंगू से लड़ाई में एक नई शुरुआत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि वैक्सीन एक प्रभावी सुरक्षा कवच जरूर बनेगी, लेकिन डेंगू से स्थायी बचाव के लिए मच्छर नियंत्रण, स्वच्छता, जागरूकता और समय पर इलाज की रणनीति को साथ लेकर चलना ही सबसे कारगर उपाय होगा।

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