
अबुआ न्यूज़ झारखंड | हेल्थ डेस्क
क्या आप कभी खुद को ऐसी कल्पनाओं में खोया हुआ पाते हैं, जहां आप अपनी पसंद की दुनिया बना लेते हैं? कभी खुद को सफल व्यक्ति के रूप में, कभी किसी कहानी के नायक के रूप में या फिर किसी काल्पनिक रिश्ते में? ऐसा करना सामान्य है और इसे डे-ड्रीमिंग (Daydreaming) कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार दिन में सपने देखना या कल्पनाओं में खो जाना मानव मस्तिष्क की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। यह रचनात्मकता बढ़ाने, तनाव कम करने और भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद कर सकती है। लेकिन जब यह आदत इतनी बढ़ जाए कि व्यक्ति वास्तविक जीवन से कटने लगे, तब यह चिंता का विषय बन सकती है।
क्या है डे-ड्रीमिंग?
डे-ड्रीमिंग वह स्थिति है जब व्यक्ति जागते हुए अपने मन में कल्पनाओं की दुनिया बना लेता है। यह अक्सर कुछ मिनटों के लिए होता है और व्यक्ति आसानी से वास्तविक दुनिया में लौट आता है।
लेकिन कुछ लोगों में यह स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है, जिसे विशेषज्ञ मैलएडैप्टिव डे-ड्रीमिंग (Maladaptive Daydreaming) कहते हैं। इसमें व्यक्ति घंटों तक कल्पनाओं में डूबा रह सकता है और पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों तथा दैनिक जिम्मेदारियों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कब बन जाती है समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि:
- आप घंटों तक कल्पनाओं में खोए रहते हैं।
- पढ़ाई या काम प्रभावित होने लगे।
- वास्तविक लोगों की तुलना में काल्पनिक दुनिया अधिक आकर्षक लगने लगे।
- परिवार और दोस्तों से दूरी बढ़ने लगे।
- कल्पनाओं से बाहर निकलना मुश्किल हो जाए।
तो यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अत्यधिक तनाव, अकेलापन, चिंता, अवसाद या भावनात्मक समस्याएं लोगों को कल्पनाओं की दुनिया में अधिक समय बिताने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। कई बार व्यक्ति वास्तविक जीवन की परेशानियों से बचने के लिए भी ऐसा करता है।
इससे कैसे बचें?
- अपने दैनिक कार्यों की योजना बनाएं।
- सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम सीमित करें।
- योग, ध्यान और व्यायाम करें।
- परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।
- यदि समस्या बढ़ रही हो तो मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी-बहुत डे-ड्रीमिंग सामान्य है और हर व्यक्ति कभी न कभी ऐसा करता है। लेकिन यदि कल्पनाओं की दुनिया आपकी पढ़ाई, करियर, रिश्तों या मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कल्पनाएं जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन वास्तविक दुनिया से जुड़ाव बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।


