RBI, SEBI और IRDAI की पहल से आने वाला नया सिस्टम बैंक, म्यूचुअल फंड और बीमा सेवाओं के लिए एकीकृत KYC सुविधा देगा।

नई दिल्ली: देश में डिजिटल वित्तीय सेवाओं को और अधिक आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। 1 अगस्त से CKYC 2.0 (Central Know Your Customer 2.0) लॉन्च किए जाने की तैयारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) और बीमा नियामक IRDAI मिलकर इस नई व्यवस्था को लागू कर सकते हैं।
CKYC 2.0 लागू होने के बाद ग्राहकों को बैंक खाता खुलवाने, म्यूचुअल फंड में निवेश करने या बीमा खरीदने के लिए बार-बार KYC कराने और हर संस्थान में अलग-अलग दस्तावेज़ जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक बार केंद्रीय डेटाबेस में पंजीकरण कराने के बाद ग्राहक को 14 अंकों का CKYC नंबर जारी किया जाएगा, जिसके आधार पर विभिन्न वित्तीय संस्थान KYC सत्यापन कर सकेंगे।
क्या है CKYC 2.0?
CKYC 2.0, मौजूदा Central KYC Registry का अपग्रेडेड और अधिक सुरक्षित संस्करण है। इसमें ग्राहकों की सत्यापित पहचान एक सुरक्षित केंद्रीय डेटाबेस में संग्रहित रहेगी। किसी भी बैंक, म्यूचुअल फंड या बीमा कंपनी को ग्राहक की जानकारी तभी उपलब्ध होगी, जब ग्राहक अपनी सहमति देगा।
इस प्रक्रिया में सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए OTP आधारित अनुमति प्रणाली लागू की जाएगी। यानी बिना ग्राहक की मंजूरी और OTP के कोई भी संस्था उसके KYC डेटा तक पहुंच नहीं सकेगी।
पुराने सिस्टम की कमियां होंगी दूर
मौजूदा CKYC प्रणाली में कई बार डुप्लीकेट रिकॉर्ड, पुरानी जानकारी और अपडेट में देरी जैसी समस्याएं सामने आती थीं। इसी वजह से बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान ग्राहकों से बार-बार KYC दस्तावेज़ मांगते थे। CKYC 2.0 इन कमियों को दूर करेगा। नए सिस्टम में रिकॉर्ड अधिक सटीक, अपडेटेड और डिजिटल रूप से सुरक्षित होंगे। इससे ग्राहकों का समय बचेगा और कागजी प्रक्रिया भी काफी कम हो जाएगी।
कैसे करेगा काम नया सिस्टम?
CKYC 2.0 के तहत ग्राहक एक बार केंद्रीय डेटाबेस में अपना पंजीकरण कराएगा। इसके बाद उसे 14 अंकों का यूनिक CKYC नंबर मिलेगा। यही नंबर भविष्य में बैंक, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनी और अन्य वित्तीय संस्थानों में पहचान सत्यापन के लिए उपयोग किया जाएगा। इस व्यवस्था के बाद हर बार आधार, पैन, पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज़ दोबारा जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित संस्था ग्राहक की अनुमति और OTP के जरिए आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेगी।
धोखाधड़ी रोकने में भी मिलेगी मदद
सरकार और नियामकों का मानना है कि CKYC 2.0 केवल सुविधा बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक लगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एकीकृत डिजिटल पहचान प्रणाली के कारण संदिग्ध लेनदेन की निगरानी आसान होगी और फर्जी दस्तावेज़ों के उपयोग की संभावना भी कम होगी।
वित्तीय सेवाओं में बढ़ेगी भागीदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि आसान KYC प्रक्रिया से बैंकिंग, म्यूचुअल फंड और बीमा जैसे क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी बढ़ेगी। अब तक जटिल KYC प्रक्रिया के कारण कई लोग निवेश और वित्तीय सेवाओं से दूरी बनाए रखते थे, लेकिन CKYC 2.0 इस बाधा को काफी हद तक समाप्त कर सकता है। अगर तय समय के अनुसार यह प्रणाली 1 अगस्त से लागू होती है, तो यह देश की डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था को और अधिक सरल, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

