सरकार का दावा, विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आय में बढ़ोतरी, कम कार्बन उत्सर्जन और बेहतर ऊर्जा सुरक्षा जैसे लाभ अधिक महत्वपूर्णपेट्रोलियम मंत्रालय का दावा, विदेशी मुद्रा की बचत, कच्चे तेल पर निर्भरता में कमी और कम कार्बन उत्सर्जन जैसे फायदे माइलेज में मामूली कमी से कहीं अधिक महत्वपूर्ण

रांची: यदि आप अपनी गाड़ी में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल के उपयोग से कुछ वाहनों की माइलेज 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकती है। हालांकि मंत्रालय का कहना है कि इससे मिलने वाले आर्थिक, पर्यावरणीय और तकनीकी लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।
मंत्रालय के अनुसार, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से विदेशी मुद्रा की बचत, कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय में वृद्धि और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल रही है। इसके अलावा कार्बन उत्सर्जन में कमी, बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, एंटी-नॉक क्षमता, तेज दहन और बेहतर इंजन पिकअप जैसे फायदे भी मिलते हैं।
हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल का सामान्य पेट्रोल से सस्ता होना जरूरी नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर इसकी कीमत पारंपरिक पेट्रोल से अधिक भी हो सकती है।
अब तक क्या रहा फायदा?
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, E20 कार्यक्रम से अब तक:
- 316 लाख टन कच्चे तेल के आयात की आवश्यकता कम हुई।
- करीब 1.97 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।
- 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई।
- लगभग 1.66 लाख करोड़ रुपये का लाभ किसानों को मिला।
2001 से चल रही थी तैयारी
सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल को बिना तैयारी के लागू नहीं किया गया। एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में हुई थी। कई वर्षों तक परीक्षण, वाहन निर्माताओं से परामर्श और एथनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बाद इसे देशभर में लागू किया गया।
पुराने वाहनों पर भी परीक्षण
मंत्रालय के मुताबिक, E20 लागू करने से पहले पुराने वाहनों के इंजन, ईंधन प्रणाली, जंग-रोधी क्षमता और अन्य तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच की गई थी। अब तक इंजन में जंग, असामान्य घिसाव या पुर्जों के समय से पहले खराब होने जैसी कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है। सरकार का कहना है कि यदि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में मामूली कमी भी आती है, तो उसके बदले देश को मिलने वाले आर्थिक, पर्यावरणीय और कृषि क्षेत्र के लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

